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Vidisha Municipality in turmoil: Notice to CMO

2026-02-15  Editor Shubham Jain  140 views

ImgResizer_Crop_Screenshot_20260215-111436साहिल अरोरा विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में प्रशासनिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नगर पालिका की कार्यप्रणाली और नियमों को ताक पर रखकर लिए गए फैसलों ने अब एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। विदिशा नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) को एक कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया गया है, जिसने विभाग में खलबली मचा दी है।

क्या है पूरा मामला?

मामला नगर पालिका की एक महत्वपूर्ण बैठक से जुड़ा है। नियमों के मुताबिक, नगर पालिका की आधिकारिक बैठकों में केवल निर्वाचित पार्षदों को ही भाग लेने का अधिकार होता है। लेकिन विदिशा में हुई हालिया बैठक में 'पार्षद प्रतिनिधियों' (Pardshad Pratinidhi) की मौजूदगी देखी गई। आरोप है कि CMO ने इन प्रतिनिधियों को न केवल बैठक में शामिल होने दिया, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उनकी दखलअंदाजी को भी नजरअंदाज किया।

इस मामले का संज्ञान लेते हुए परियोजना अधिकारी (Project Officer) ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने CMO को नोटिस जारी कर इस 'नियम विरुद्ध' उपस्थिति पर जवाब तलब किया है।

नियमों की अनदेखी पड़ी भारी

नगर पालिका अधिनियम के तहत, कोई भी निर्वाचित सदस्य अपनी जगह किसी प्रतिनिधि को आधिकारिक बैठक में नहीं भेज सकता। अक्सर देखा जाता है कि महिला पार्षदों या व्यस्त पार्षदों की जगह उनके पति या समर्थक बैठकों में हिस्सा लेते हैं, जिसे 'प्रतिनिधि संस्कृति' कहा जाता है। विदिशा में इसी संस्कृति पर अब गाज गिरी है।

परियोजना अधिकारी ने अपने नोटिस में स्पष्ट रूप से पूछा है कि:

 किन परिस्थितियों में बाहरी व्यक्तियों (प्रतिनिधियों) को सरकारी बैठक में प्रवेश दिया गया?

  क्या यह प्रशासनिक गोपनीयता और नियमों का उल्लंघन नहीं है?

 इस लापरवाही के लिए उत्तरदायी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों न की जाए?

प्रशासनिक हलकों में चर्चा गरम

सूत्रों की मानें तो यह विवाद केवल एक बैठक तक सीमित नहीं है। विदिशा नगर पालिका में लंबे समय से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी की खबरें आती रही हैं। परियोजना अधिकारी द्वारा सीधे CMO को नोटिस थमाना यह दर्शाता है कि प्रशासन अब ढर्रे पर चल रही व्यवस्था को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

इस नोटिस के बाद नगर पालिका के गलियारों में सन्नाटा पसरा है। वहीं, उन पार्षदों में भी हड़कंप है जिनके प्रतिनिधि शान से बैठकों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे। अब सबकी नजरें CMO के जवाब पर टिकी हैं। अगर जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो CMO की कुर्सी पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।

क्या होगी अगली कार्रवाई?

प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार, CMO को एक निश्चित समयावधि के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा।

 विकल्प 1: यदि CMO अपनी गलती स्वीकार करते हैं, तो उन्हें भविष्य के लिए सख्त हिदायत मिल सकती है।

 विकल्प 2: यदि बैठक की रिकॉर्डिंग या सबूतों के आधार पर नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया गया, तो मामला उच्च अधिकारियों (कलेक्टर या नगरीय प्रशासन विभाग) तक जा सकता है।

विदिशा की जनता अब यह देख रही है कि नियमों का पाठ पढ़ाने वाला प्रशासन खुद के घर में लगी इस आग को कैसे बुझाता है। क्या वाकई नगर पालिका में 'सिस्टम' सुधरेगा या यह नोटिस महज एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा?


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