
ग्यारसपुर। मध्य प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता जताई गई है। हाल ही में राजगढ़ जिले के कुरावर में पत्रकार मनोज मेवाड़ा पर हुए जानलेवा हमले के बाद, जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ मध्य प्रदेश की ग्यारसपुर इकाई ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में तत्काल पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग की गई है, ताकि प्रदेश में पत्रकारों को निष्पक्ष और निडर होकर काम करने का माहौल मिल सके।
पत्रकार पर जानलेवा हमला: लोकतंत्र का चौथा स्तंभ खतरे में
यह पूरा मामला राजगढ़ के कुरावर से जुड़ा है, जहां जर्नलिस्ट यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष मनोज मेवाड़ा पर कुछ असामाजिक तत्वों ने जानलेवा हमला किया। इस घटना ने न सिर्फ पत्रकारों में डर पैदा किया है, बल्कि पूरे समाज में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ग्यारसपुर इकाई के अध्यक्ष देवेंद्र धाकड़ ने इस घटना को बेहद निंदनीय बताया है। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज की सच्चाई उजागर करते हैं, लेकिन जब वही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो आम जनता की आवाज कौन उठाएगा?
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद स्थानीय पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। ज्ञापन में बताया गया है कि कुरावर थाने की प्रभारी संगीता शर्मा ने शुरुआत में कार्रवाई करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। पत्रकारों के दबाव बनाने के बाद ही एफआईआर दर्ज की गई। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ित पत्रकार पर ही समझौता करने का दबाव बनाया गया। यह दर्शाता है कि पत्रकारों को न्याय के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
पत्रकार सुरक्षा कानून की वर्षों पुरानी मांग
जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ मध्य प्रदेश का कहना है कि वे वर्षों से पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं और प्रदर्शन भी हुए हैं, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि पत्रकारों को अपनी जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ रहा है।
ग्यारसपुर इकाई ने मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 'सर्व-जन हिताय, सर्व-जन सुखाय' की भावना से काम करते हैं, और उन्हें उम्मीद है कि वे पत्रकारों के हित में जल्द ही पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करेंगे।
इस घटना ने पूरे प्रदेश के पत्रकारों को एकजुट कर दिया है और सभी की निगाहें अब सरकार पर टिकी हैं कि इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाया जाता है।