
विदिशा, [8/7/2025]: गंजबासौदा के गांधी चौक निवासी प्रख्यात लोकतंत्र सेनानी, मीसाबंदी और आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के पूर्व अध्यक्ष, 84 वर्षीय एडवोकेट नेमीचंद जैन का 7 जुलाई को सुबह निधन हो गया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन उनके जीवन का अंतिम निर्णय लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया। अपनी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए, परिवार ने विकास पचौरी फाउंडेशन के सहयोग से उनके नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद, उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, जो उनके देश और समाज के प्रति समर्पण का प्रमाण था।
नेमीचंद जैन का जीवन न केवल एक अधिवक्ता के रूप में कानून के प्रति समर्पित रहा, बल्कि उन्होंने लोकतंत्र सेनानी और मीसाबंदी के रूप में देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए भी संघर्ष किया। उनका निधन एक युग की समाप्ति थी, लेकिन उनके द्वारा किया गया नेत्रदान दो लोगों के जीवन में रोशनी लाने का एक महान कार्य बन गया।
जीवन की अंतिम इच्छा: नेत्रदान का संकल्प
नेमीचंद जैन हमेशा से ही समाज सेवा के कार्यों में अग्रणी रहे थे। उनकी इस भावना का सबसे बड़ा प्रमाण उनके द्वारा लिया गया नेत्रदान का संकल्प था। विकास पचौरी फाउंडेशन ने गंजबासौदा में नेत्रदान, देहदान और अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक शिविर का आयोजन किया था। यह 12 फरवरी 2021 की बात है, जब नेमीचंद जैन ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना नेत्रदान संकल्प पत्र भरा था। उन्होंने तब ही यह तय कर लिया था कि उनके जाने के बाद उनकी आंखें किसी और की दुनिया रोशन करेंगी।
7 जुलाई को सुबह जब उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली, तो परिवार ने बिना देर किए उनकी इस पवित्र इच्छा का सम्मान करने का फैसला किया। उन्होंने तुरंत विकास पचौरी फाउंडेशन से संपर्क साधा। फाउंडेशन ने भी तत्परता दिखाते हुए विदिशा के प्रतिष्ठित अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज के आई बैंक से समन्वय स्थापित किया।
तत्काल कार्यवाही: विदिशा से बासौदा पहुंची डॉक्टरों की टीम
मानवता की इस पुकार पर मेडिकल कॉलेज की टीम ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाई। कॉलेज के डीन डॉ. मनीष निगम के कुशल नेतृत्व में, प्राध्यापक डॉ. एससीएल चंद्रवंशी के मार्गदर्शन में, एक विशेष टीम विदिशा से गंजबासौदा के लिए रवाना हुई। इस टीम में सहायक प्राध्यापक डॉ. निखिला यादव, सीनियर रेजिडेंट डॉ. प्रहर श्रीवास्तव, डॉ. निकिता श्रीवास्तव, पीजी रेजिडेंट डॉ. शेरन आहुजा, और नर्सिंग ऑफिसर पुष्पलता मरावी एवं रेणुका लेवी शामिल थीं।
टीम ने गंजबासौदा पहुंचकर पूरी विशेषज्ञता और संवेदनशीलता के साथ नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। यह क्षण न केवल नेमीचंद जैन के परिवार के लिए भावनात्मक था, बल्कि यह समाज में अंगदान के प्रति बढ़ती जागरूकता और मेडिकल समुदाय की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक था। अब नेमीचंद जैन के दोनों नेत्रों का प्रत्यारोपण किन्हीं दो अलग-अलग नेत्रहीन व्यक्तियों को हो सकेगा, जिससे उन्हें इस खूबसूरत दुनिया को देखने का सौभाग्य प्राप्त होगा। यह वास्तव में जीवन के बाद भी जीवन देने का एक अद्भुत उदाहरण है।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई: एक समर्पित जीवन को सलाम
नेत्रदान के इस महान कार्य के बाद, लोकतंत्र सेनानी एडवोकेट नेमीचंद जैन को गंजबासौदा के पाराशरी विश्राम घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। यह सम्मान उनके राष्ट्र और समाज के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक था। पुलिस के सशस्त्र बल ने उन्हें अंतिम सलामी दी, जो उनके बलिदान और देश सेवा को नमन था। इस दौरान कई प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस महान आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
नेमीचंद जैन का सार्वजनिक जीवन भी अत्यंत प्रभावशाली रहा। वे 1951 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे और 84 वर्ष की उम्र तक भी पार्टी के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। वे एक कुशल वक्ता के रूप में भी जाने जाते थे, जिनकी बातें लोगों को प्रेरित करती थीं। उनके निधन से एक ऐसे समर्पित कार्यकर्ता और समाज सेवक की कमी महसूस की जाएगी, जिसने न केवल अपने परिवार (जिसमें उनके पुत्र एडवोकेट संजय कुमार जैन और एडवोकेट सिद्धार्थ कुमार जैन शामिल हैं) के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक आदर्श स्थापित किया।
नेमीचंद जैन का जीवन एक प्रेरणा है, जो हमें सिखाता है कि कैसे हम अपने निधन के बाद भी दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उनका नेत्रदान का फैसला और उन्हें मिला राजकीय सम्मान, दोनों ही समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ गए हैं।