
जितेन्द्र शर्मा विदिशा नगर पालिका की आपसी गुटबाजी और निष्क्रियता का फायदा उठाकर शहर में अवैध होर्डिंग्स का जाल बिछ चुका है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि बिजली के पोल, निजी भवनों की छतें और मुख्य चौराहे तक इन विशालकाय होर्डिंग्स से पाट दिए गए हैं। नियम-कायदे तार-तार हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर बैठे हैं।
खतरे में शहर, लेकिन नीति अब भी अधर में
जिला मुख्यालय पर बिना किसी मानक के भारी-भरकम होर्डिंग्स लगाए जा रहे हैं। इन स्ट्रक्चर्स की नींव कितनी मजबूत है, इसकी जांच करने वाला तक कोई नहीं। तेज़ आंधी-तूफान में ये कभी भी गिर सकते हैं और बड़ा हादसा हो सकता है। लेकिन नगर पालिका के जिम्मेदार अब भी सिर्फ नीति बनाने की बातें कर रहे हैं, कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है।
राजनीतिक दलों की मनमानी, प्रशासन की मेहरबानी
राजनीतिक पार्टियों के प्रचार हो या बड़े आयोजनों की घोषणा—सबसे पहले बिजली के खंभों को ही निशाना बनाया जाता है। नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम होर्डिंग्स लटकाए जाते हैं, लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं। आयोजन खत्म होते ही नगर पालिका औपचारिकता के लिए कुछ होर्डिंग्स ज़ब्त कर दिखावा करती है, फिर वही ढाक के तीन पात।
सिर्फ मुनाफे का खेल, जनता की सुरक्षा दांव पर
जिम्मेदारों की ढिलाई के चलते होर्डिंग एजेंसियां इन अवैध स्ट्रक्चर्स से लाखों की कमाई कर रही हैं, लेकिन शहरवासियों की सुरक्षा को कोई पूछने वाला नहीं। पीतल मिल चौराहा, माधवगंज बस स्टैंड, विवेकानंद चौक, गांधी चौक, बाल विहार और दोनों ब्रिज समेत कई इलाकों में ये खतरनाक होर्डिंग्स हादसों को न्योता दे रहे हैं।
आखिर कब जागेगी नगर पालिका?
विदिशा की खूबसूरती पर ग्रहण लगाने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान कब होगा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? नगर पालिका की जिम्मेदारी केवल नीति बनाने तक ही सीमित रहेगी या फिर ठोस कार्रवाई भी होगी? ये सवाल शहरवासियों के मन में हैं, लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं।