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गांव के स्कूल की नई तस्वीर: शिक्षक के समर्पण की मिसाल शिक्षक ब्रह्मानंद मीणा की मेहनत ने दिलाई शासकीय विद्यालय को नई पहचान

2025-01-03  Editor Shubham Jain  5,218 views

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रिपोर्ट: अतुल जैन

खनियाधाना। शासकीय प्राथमिक विद्यालय भुजरऊ के शिक्षक ब्रह्मानंद मीणा ने अपनी कड़ी मेहनत और नवाचारी प्रयासों से विद्यालय की तस्वीर बदल दी है। उनकी प्रेरणा और समर्पण ने वह संभव कर दिखाया है, जो अक्सर सरकारी स्कूलों में दुर्लभ माना जाता है—शत प्रतिशत उपस्थिति।

विकासखंड स्त्रोत समन्वयक संजय भदोरिया ने बताया कि ब्रह्मानंद मीणा ने शिक्षा में नवीन तकनीकों और गतिविधियों का उपयोग कर बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित किया। उनके एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी) कार्यक्रम और खेल-खेल में पढ़ाई की तकनीक ने बच्चों को आकर्षित किया।

2014 में शुरुआत और बदलाव की दिशा

2014 में विद्यालय में पहली नियुक्ति के दौरान ब्रह्मानंद मीणा ने देखा कि छात्रों की उपस्थिति बेहद कम थी। उन्होंने माता-पिता और समुदाय से संवाद किया, घर-घर जाकर छात्रों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के लिए टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटीरियल) का प्रयोग किया और शून्य निवेश नवाचार के तहत गतिविधियां आयोजित कीं।

कोरोना काल में भी बनी प्रेरणा

महामारी के दौरान, जब स्कूल बंद थे, मीणा ने बच्चों से संपर्क बनाए रखा। उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप और फोन कॉल्स के जरिए पढ़ाई जारी रखी।

सम्मान और उपलब्धियां

ब्रह्मानंद मीणा की मेहनत को जिला स्तर पर भी सराहा गया। उन्हें विकासखंड और जिला स्तर पर "उत्कृष्ट शिक्षक" के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

आज, विद्यालय में बच्चों की शत प्रतिशत उपस्थिति उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है। शिक्षक ब्रह्मानंद मीणा ने यह साबित कर दिया है कि समर्पण और सही दृष्टिकोण से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। उनके प्रयासों से यह विद्यालय पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बन गया है।


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