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विदिशा में महाशिवरात्रि की धूम: श्री वैष्णव छीपा समाज मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, भजनों पर झूमे भक्त

2026-02-15  Editor Shubham Jain  101 views

ImgResizer_IMG-20260215-WA0074विदिशा। "अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चंडाल का, काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का..."। भगवान भोलेनाथ की भक्ति के कुछ ऐसे ही जयकारों के साथ आज समूची विदिशा नगरी शिवमय हो गई है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिरों में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि हर गली और हर कोना 'बम-बम भोले' के उद्घोष से गूंज उठा।

विशेष रूप से विदिशा के वरईपुरा स्थित श्री वैष्णव छीपा समाज मंदिर में इस बार महाशिवरात्रि का पर्व बेहद भव्य और अनूठे रूप में मनाया जा रहा है। यहाँ आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं का मन भी मोह लिया है।

पार्थिव शिवलिंग निर्माण: मिट्टी से रचे गए देवाधिदेव महादेव

श्री वैष्णव छीपा समाज के नव युवक मंडल द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'पार्थिव शिवलिंग निर्माण' रहा। शास्त्रों में पार्थिव पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। सुबह से ही समाज के युवाओं और वरिष्ठों ने मिलकर शुद्ध मिट्टी से शिवलिंग तैयार किए। इसके पश्चात, पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और गन्ने के रस से हुए इस महाअभिषेक को देखने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।

भजनों की स्वर लहरियों पर थिरके श्रद्धालु

भक्ति जब चरम पर होती है, तो पैर अपने आप थिरकने लगते हैं। मंदिर परिसर में आयोजित भजन कीर्तन के दौरान कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। जैसे ही गायकों ने भोलेनाथ के सुरीले भजन छेड़ना शुरू किए, वहां मौजूद महिला, पुरुष और बच्चे खुद को रोक नहीं पाए। पूरा परिसर तालियों की गूँज और नृत्य करते भक्तों से भर गया। ऐसा लग रहा था मानो साक्षात शिव गण धरती पर उतर आए हों। भक्ति का यह उल्लास बताता है कि महादेव के प्रति विदिशावासियों की अटूट श्रद्धा कितनी गहरी है।

प्रसादी वितरण और सामाजिक समरसता

कार्यक्रम के दौरान केवल पूजा-अर्चना ही नहीं, बल्कि सेवा भाव का भी अद्भुत उदाहरण पेश किया गया। नव युवक मंडल द्वारा सभी श्रद्धालुओं के लिए उत्तम फलाहारी प्रसादी का प्रबंध किया गया। लाइन में लगे हर भक्त को बड़े ही आदर के साथ प्रसादी वितरित की गई। इस आयोजन में समाज के बुजुर्गों का मार्गदर्शन और युवाओं का उत्साह देखने लायक था। छोटे-छोटे बच्चे भी भगवान शिव के रूप में सज-धज कर मंदिर पहुँचे, जो आकर्षण का केंद्र रहे।

विशिष्टता और व्यवस्था

वरईपुरा क्षेत्र में इस आयोजन को लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं। छीपा समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि महाशिवरात्रि का यह पर्व समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देता है। मंदिर की सजावट फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से की गई है, जो रात के समय और भी मनोरम दृश्य प्रस्तुत कर रही है। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए नव युवक मंडल के वॉलिंटियर्स मुस्तैद दिखे ताकि किसी भी श्रद्धालु को दर्शन में असुविधा न हो।

श्रद्धालुओं का अनुभव

दर्शन करने पहुँचे स्थानीय निवासी राजेश छीपा ने बताया, “हर साल हम यहाँ आते हैं, लेकिन इस बार की रौनक और पार्थिव पूजन ने मन को शांति पहुँचाई है। भजनों का माहौल इतना दिव्य है कि जाने का मन ही नहीं कर रहा।”

विदिशा के अन्य शिव मंदिरों जैसे बाढ़ वाले गणेश मंदिर के पास स्थित शिव मंदिर और अन्य शिवालयों में भी भारी भीड़ देखी जा रही है, लेकिन श्री वैष्णव छीपा समाज द्वारा आयोजित यह सामूहिक पार्थिव पूजन अपनी विशिष्टता के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है।


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