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1857 से पहले ही क्रांति का बिगुल फूंकने वाले प्रथम जनजाति नायक: तिलका मांझी की शौर्य गाथा

2026-02-16  Editor Shubham Jain  51 views

ImgResizer_IMG-20260216-WA0074करेली। इतिहास के पन्नों में कई ऐसे नायक हैं जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दी, लेकिन उनकी वीरता की गूँज आज भी हमें रोमांचित कर देती है। ऐसे ही एक महान क्रांतिकारी थे तिलका मांझी, जिन्हें भारत के प्रथम जनजाति स्वतंत्रता सेनानी होने का गौरव प्राप्त है।

हाल ही में वनवासी विकास परिषद द्वारा करेली के धूनी अखाड़े में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में तिलका मांझी के बलिदान को याद किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित वनवासी विकास परिषद के प्रांत सदस्य सृजनेश सिलाकारी ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि तिलका मांझी केवल जनजाति समाज के नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के लिए स्वतंत्रता संग्राम के असली प्रणेता थे।

कलेक्टर क्लीवलैंड को तीरों से कर दिया था छलनी

तिलका मांझी का जन्म 11 फरवरी 1750 को बिहार के सुल्तानगंज के पास तिलकपुर गांव में एक संथाल परिवार में हुआ था। जब देश में 1857 की क्रांति की सुगबुगाहट भी नहीं थी, उससे कहीं पहले तिलका मांझी ने अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था।

सृजनेश जी ने बताया कि साल 1784 में तिलका मांझी ने साहस का परिचय देते हुए ईस्ट इंडिया कंपनी के क्रूर कलेक्टर आगस्टस क्लीवलैंड को अपने तीरों से छलनी कर मौत के घाट उतार दिया था। वे गोरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) की कला में इतने निपुण थे कि ब्रिटिश सेना उनसे खौफ खाती थी।

अमानवीय यातनाएं भी नहीं डिगा सकीं हौसला

अंग्रेजों ने अपनी हार का बदला लेने के लिए छल-कपट का सहारा लिया और तिलका मांझी को गिरफ्तार किया। उनकी वीरता से बौखलाए अंग्रेजों ने उन्हें 13 जनवरी को 40 किलोमीटर दूर तक घोड़ों से घसीटकर भागलपुर ले जाया और वहां एक बरगद के पेड़ से लटकाकर उन्हें फांसी दे दी। आज भी वह स्थान उनकी शहादत की गवाही देता है।

धूनी अखाड़े में श्रद्धा सुमन अर्पित

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान हनुमानजी, दादा धूनी वाले और महान नायक तिलका मांझी के चित्र पर पुष्प अर्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई।

  साप्ताहिक हनुमान चालीसा की अपील: परिषद के विभाग सदस्य सौरभ सोनी ने राम मंदिर में होने वाले साप्ताहिक हनुमान चालीसा के बारे में जानकारी दी और सभी से धर्म व श्रद्धा के इस कार्य में जुड़ने की अपील की।

  प्रमुख उपस्थिति: कार्यक्रम का संचालन जिला सचिव रोहित रजक ने किया, जबकि आभार उपाध्यक्ष रोहित नामदेव ने व्यक्त किया। इस अवसर पर शंकर सिंह ठाकुर, दीपक कोल, रामकुमार विश्वकर्मा, दीपक शर्मा, भानुप्रताप कहार और मुकेश नामदेव सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

भारत माता और तिलका मांझी के गगनभेदी जयघोष के साथ इस प्रेरणादायी कार्यक्रम का समापन हुआ।


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