
विदिशा स्वाति श्रीवास्तव की रिपोर्ट सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों को हल करने के बजाय इधर-उधर शिफ्ट करने वाले अधिकारियों पर गाज गिर गई है। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने लंबित मामलों को गंभीरता से न लेने और सौ दिन से ज्यादा पुरानी शिकायतों को अब तक टालते रहने पर नाराजगी जताई। उन्होंने ऐसे लापरवाह अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो निलंबन और आर्थिक दंड जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतों का समाधान नहीं, सिर्फ शिफ्टिंग!
कलेक्टर ने बैठक में पांच प्रमुख शिकायतों का जिक्र किया, जो एल-1 स्तर पर ही हल हो सकती थीं। लेकिन अफसरों ने समाधान के बजाय उन्हें एक-दूसरे विभाग को भेजने में ही मशगूल रहे। एक शिकायत को पहले विभाग से दूसरे, फिर तीसरे और अंततः वापस पहले विभाग को भेज दिया गया। यह खेल चलता रहा, लेकिन समाधान नहीं निकला। इस गैर-जिम्मेदार रवैये पर सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस थमा दिए गए हैं।
तालमेल की कमी से बिगड़े हालात
कलेक्टर ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि आपसी समन्वय और तालमेल पूरी तरह गायब है। अधिकारी शिकायतों का हल निकालने के बजाय उनसे बचने की कोशिश कर रहे हैं, जो उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब से किसी भी विभाग को हेल्पलाइन की शिकायतों को टालने की छूट नहीं मिलेगी।
अब बिना अनुमति नहीं होगी शिफ्टिंग
कलेक्टर ने आदेश दिया है कि यदि कोई शिकायत किसी अन्य विभाग से जुड़ी है, तो उसे संबंधित जिलाधिकारी की अनुमति के बाद ही ट्रांसफर किया जाएगा। साथ ही, हर लंबित मामले की जानकारी सीएम हेल्पलाइन जिला नोडल अधिकारी को देना अनिवार्य होगा।
महत्वपूर्ण लंबित शिकायतें
बैठक में हेल्पलाइन की कुछ अहम शिकायतों की समीक्षा हुई, जिनमें शामिल हैं:
महिला एवं बाल विकास विभाग: बच्चों को पोषण आहार और टेक होम राशन न मिलना, रसोइयों का मानदेय अटका होना।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग: ग्राम पंचायत ऊहर में नल जल योजना को लेकर भ्रम की स्थिति – विभाग कह रहा है योजना हस्तांतरित हो चुकी है, जबकि हकीकत में नहीं हुई।
तकनीकी शिक्षा विभाग: बच्चों की समग्र आईडी बनी तो है, लेकिन पोर्टल पर मैप नहीं हो रही, जबकि विभाग दावा कर रहा कि आईडी बनी ही नहीं।
खाद्य आपूर्ति विभाग: पात्रता पर्ची पर समग्र आईडी तो दर्ज है, लेकिन सत्यापन न होने से राशन नहीं मिल रहा।
पंचायत विभाग: विदिशा नगरपालिका को हस्तांतरित की गई शिकायतें बिना समाधान के लटकी हुई हैं।
इन विभागों में सबसे ज्यादा लंबित आवेदन
बैठक में पाया गया कि हेल्पलाइन पर 50 दिन से ज्यादा लंबित शिकायतें इन विभागों में सबसे ज्यादा हैं:
महिला एवं बाल विकास: 3698 मामले
राजस्व विभाग: 752 मामले
स्वास्थ्य विभाग: 702 मामले
खाद्य विभाग: 384 मामले
गृह विभाग: 289 मामले
इसके अलावा, अनुसूचित जाति कल्याण, शिक्षा, पंचायत, नगरीय विकास, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, कृषि, श्रम और उच्च शिक्षा विभागों में भी सैकड़ों शिकायतें अटकी पड़ी हैं।
साप्ताहिक टारगेट और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
कलेक्टर ने विभागवार साप्ताहिक टारगेट तय कर दिया है और स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि लक्ष्य के अनुसार शिकायतों का निपटारा नहीं हुआ, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, राजस्व वसूली, खाद-बीज आपूर्ति, जल जीवन मिशन, स्वास्थ्य, आयुष्मान योजना, पेंशन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, अवैध खनन, शराब बिक्री, आंगनबाड़ी निर्माण, पीएम विश्वकर्मा योजना, दिव्यांग प्रमाण पत्र, शून्य प्रवेश शालाओं की स्थिति सहित कई मुद्दों की भी समीक्षा की गई।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
कलेक्ट्रेट के बेतवा सभागार में हुई इस अहम बैठक में संयुक्त कलेक्टर मोहिनी शर्मा, निकिता तिवारी, जिला पंचायत सीईओ पंकज जैन समेत विभिन्न विभागों के जिलाधिकारी मौजूद रहे। वहीं, खंड स्तरीय अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद किया गया।
अब देखना होगा कि इस सख्ती का कितना असर होता है और लंबित शिकायतों का समाधान कितना तेज़ी से होता है!