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विदिशा: सागौन माफिया का दुस्साहस, दबिश देने गई वन विभाग की टीम पर जानलेवा हमला Vidisha: Teak mafia's audacity, deadly attack on forest department team that went to raid

2026-02-19  Amit raikwar  645 views

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शुभम् जैन विदिशा। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। शमशाबाद वन परिक्षेत्र के छापर उमरिया गांव में अवैध सागौन की लकड़ी जब्त करने पहुंची वन विभाग की टीम पर लकड़ी माफियाओं ने हमला कर दिया। इस हमले में कई वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

- कार्रवाई के दौरान भारी लट्ठ और पत्थरों से हमला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन विभाग की टीम को छापर उमरिया गांव में जंगल से अवैध रूप से काटी गई कीमती सागौन की लकड़ी रखे होने की सूचना मिली थी। जब टीम मौके पर पहुंची और जब्ती की कार्रवाई शुरू की, तभी माफिया और उनके समर्थकों ने टीम को घेर लिया।

- महिलाकर्मी वनकर्मी से भी अभद्रता

वनकर्मियों पर हमले के कई वीडियो जमकर शोसल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और मौके के वीडियो के अनुसार, माफियाओं ने ड्यूटी पर तैनात एक महिला वनकर्मी के साथ धक्का-मुक्की की और उन्हें गिराने का प्रयास किया। हमले में कई वनकर्मियों को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। घायल कर्मचारियों को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार जारी है।

- सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल

विदिशा का शमशाबाद, लटेरी वन क्षेत्र लंबे समय से लकड़ी तस्करी के लिए संवेदनशील रहा है। खुलेआम सरकारी टीम पर हमला करना यह दर्शाता है कि माफियाओं के मन में कानून का भय खत्म हो चुका है।

"यह हमला न केवल वनकर्मियों पर है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा के संकल्प पर भी प्रहार है। वर्दीधारी कर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार प्रशासन की सख्ती पर सवाल खड़ा करता है।

- अब तक की कार्रवाई

पुलिस और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं आरोपियों की पहचान की जा रही है और क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

- तस्करी का नेटवर्क विदिशा से राजस्थान तक

विदिशा के कीमती सागौन की मांग पड़ोसी राज्य राजस्थान सहित देश के कई अन्य हिस्सों में भी है। सूत्रों के अनुसार, माफिया जंगलों से अवैध रूप से सागौन काटकर उसे अंतरराज्यीय सीमाओं के पार धड़ल्ले से भेज रहे हैं। इस पूरे खेल में फर्नीचर उद्योग एक बड़े 'सिंडिकेट' के रूप में उभर कर सामने आया है, जहाँ बिना किसी वैध दस्तावेज के इमारती लकड़ी को खपाया जा रहा है।

- खेती के लिए 'साफ' किए जा रहे जंगल

विभागीय सूत्रों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि माफिया अब केवल लकड़ी चोरी तक सीमित नहीं हैं। योजनाबद्ध तरीके से जंगलों की कटाई कर उस जमीन को खेती योग्य बनाया जा रहा है। वन भूमि पर बढ़ते इस अतिक्रमण ने भविष्य में वनों के पूर्ण विनाश की आशंका पैदा कर दी है।

- विशेषज्ञ राय “अस्तित्व के संकट में जंगल”

समाचार एजेंसी के वरिष्ठ पत्रकार अमित रैकवार ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा “सागौन तस्करी का यह काला खेल कई वर्षों से बदस्तूर जारी है। यह केवल बाहरी तस्करों का काम नहीं है, इसमें स्थानीय वनकर्मियों की मिलीभगत और निष्क्रियता साफ नजर आती है। लगातार जंगलों को काटकर खेती की जमीन तैयार करना एक गंभीर पर्यावरणीय अपराध है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जंगलों का अस्तित्व केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।”

- प्रमुख बिंदु आखिर क्यों बेखौफ हैं तस्कर...?

निगरानी का अभाव: बीट गार्ड्स और स्थानीय अमले की गश्त केवल कागजों तक सीमित।

फर्नीचर माफिया: बड़े शहरों के फर्नीचर व्यवसायी अवैध लकड़ी के सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे हैं।

राजनीतिक एवं प्रशासनिक सांठगांठ: पकड़े जाने पर अक्सर 'ऊपरी दबाव' के कारण कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है।

- निष्कर्ष

विदिशा के जंगलों की यह स्थिति नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि वन विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहता है, तो सागौन के ये बेशकीमती जंगल इतिहास बन जाएंगे।


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