
विदिशा, – मध्य प्रदेश के विदिशा शहर में एक भव्य विवाह समारोह उस वक्त सनसनीखेज वारदात में बदल गया, जब मेहमानों की चहल-पहल के बीच किसी ने चोरी की एक बड़ी वारदात को अंजाम दे डाला। शहर के प्रतिष्ठित कामधेनू गार्डन में आयोजित इस शादी समारोह से अज्ञात चोर करीब 12 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात लेकर चंपत हो गए। मामले ने शहर में हड़कंप मचा दिया, लेकिन कोतवाली पुलिस ने अपनी तेज कार्रवाई और तकनीकी सूझबूझ से कुछ ही दिनों में इस रहस्य से पर्दा उठा दिया।
शादी में आए थे मेहमान, पर नज़रें थीं बेशकीमती जेवरों पर
30 अप्रैल को शमशाबाद निवासी फरियादी मनोज साहू अपने परिवार सहित कामधेनू गार्डन में एक वैवाहिक कार्यक्रम में शरीक होने आए थे। समारोह के दौरान उन्होंने अपने कीमती गहनों से भरा बैग समारोह स्थल के कमरे में सुरक्षित रखा था। लेकिन शादी की भीड़ और हलचल के बीच, किसी ने मौके का फायदा उठाते हुए बैग को चुपचाप गायब कर दिया।
जब परिवार को चोरी का पता चला, तो तुरंत कोतवाली थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने धारा 305(ए) बीएनएस के तहत मामला पंजीबद्ध कर जांच शुरू की।
बड़ी चुनौती थी – दर्जनों संदिग्ध, सैकड़ों फुटेज
पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे और नगर पुलिस अधीक्षक अतुल सिंह के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी आनंद राज के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की गई। इस टीम को जल्द से जल्द आरोपियों को पकड़ने का निर्देश दिया गया।
पुलिस टीम ने 200 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज को खंगाला। घटना स्थल और आसपास के इलाके में लगे कैमरों से हर एक संदिग्ध गतिविधि का विश्लेषण किया गया। साथ ही, 100 से अधिक पुराने नकबजन और निगरानी बदमाशों से पूछताछ की गई।
सायबर सेल की मदद से मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग, कॉल डिटेल एनालिसिस और सोशल मीडिया स्कैनिंग जैसे तकनीकी उपायों का इस्तेमाल किया गया। ये जांच पुलिस को एक बेहद चौंकाने वाली सच्चाई तक ले गई।
गिरफ्तार हुए वे लोग, जो पहले मेहमानों जैसे दिखते थे
पुलिस ने जो सच्चाई उजागर की, उसने सबको चौंका दिया। चोरी को अंजाम देने वाले आरोपी कोई बाहरी पेशेवर अपराधी नहीं थे, बल्कि स्थानीय युवक थे, जिन्होंने शादी जैसे मौके को लूट का जरिया बना लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
शिवम झां, उम्र 28 वर्ष, निवासी शेरपुरा, वर्तमान पता: साईं कॉलोनी, अहमदपुर रोड, विदिशा
दीवान सिंह अहिरवार, उम्र 30 वर्ष, निवासी वार्ड नं. 31, शेरपुरा, विदिशा
तीसरा आरोपी विकास कुमार भी मामले में संलिप्त पाया गया, जिसने बेचे गए जेवरात की बरामदगी में भूमिका निभाई।
बरामदगी में भी मिला बड़ा सफलता का सुराग
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने चोरी गए अधिकांश गहनों को बरामद कर लिया। बरामद मशरूका में शामिल हैं:
4 सोने की चूड़ियाँ
1 सोने का हार
2 मंगलसूत्र
2 सोने के टॉप्स
1 सोने की बिंदी
1 अंगूठी
1 चांदी की करधौनी
एक बाइक (MP40-MX-5496), जिसका उपयोग चोरी में किया गया था
कुल बरामदगी की अनुमानित कीमत: ₹12 लाख
टीमवर्क और तकनीकी दक्षता बनी सफलता की चाबी
इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी आनंद राज के साथ-साथ सायबर सेल के अधिकारी गौरव रघुवंशी, दीपक राठौर, प्रआर पवन जैन, प्रआर जितेन्द्र खटीक, आरक्षक धर्मेन्द्र शर्मा, अजय सिकरवार, संदीप जाट, आकाश राणा, आनंद गौतम आदि की प्रमुख भूमिका रही।
विशेष रूप से CCTV फुटेज के विश्लेषण और तकनीकी डेटा की प्रोसेसिंग में टीम ने अत्यंत दक्षता दिखाई, जिससे आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली।
जनता में बढ़ा भरोसा, पुलिस को मिलेगा सम्मान
इस साहसिक और प्रभावी कार्रवाई से शहरवासियों में पुलिस के प्रति विश्वास और सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। कोतवाली पुलिस की तत्परता और पेशेवर कार्यशैली ने साबित कर दिया कि अपराधी कितने भी चतुर क्यों न हों, कानून के हाथ लंबें होते हैं।
पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी ने इस विशेष सफलता पर पूरी टीम के लिए पुरस्कार की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने कहा कि “पुलिस की सतर्कता, टीम वर्क और आधुनिक तकनीक का बेहतर समन्वय ही अपराध पर नियंत्रण का सबसे सशक्त साधन है।”
शादी की चकाचौंध के बीच हुई इस चोरी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अपराधी अपने मौके की तलाश में रहते हैं, लेकिन सजग और तकनीकी रूप से सक्षम पुलिस व्यवस्था उन्हें ज्यादा दूर तक भागने नहीं देती। कोतवाली पुलिस की यह कार्रवाई आने वाले समय में अन्य अपराधों के लिए भी एक उदाहरण बनेगी।