
विदिशा। कानून की सख्ती और खाकी की समझाइश जब मिल जाए, तो बड़े-बड़े विवाद चुटकियों में सुलझ जाते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा विदिशा की 'पुलिस पंचायत' में देखने को मिला, जहाँ न केवल लाखों रुपये की डूबी हुई रकम वापस कराई गई, बल्कि टूटने की कगार पर खड़े रिश्तों को भी एक नई डोर से बांध दिया गया।
पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के कुशल मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे की अध्यक्षता में आयोजित इस साप्ताहिक बैठक में कई ऐसे मामले सामने आए, जिन्हें देखकर पंचायत के सदस्य भी हैरान रह गए। कोर कमेटी सदस्य आर. कुलश्रेष्ठ, प्रमोद व्यास, अतुल शाह, डॉ. सचिन गर्ग और पार्थ पितलिया की मौजूदगी में न्याय का यह मंच लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा।
1. जमीन का सौदा या धोखाधड़ी? बुजुर्ग महिला को मिले 17.50 लाख
सबसे चौंकाने वाला मामला एक बुजुर्ग महिला से जुड़ा था। उन्होंने अपनी जमा-पूंजी और उधार लेकर 15 लाख रुपये एक जमीन के सौदे में लगाए थे। लेकिन ऐन वक्त पर विक्रेता ने पावर ऑफ अटॉर्नी न होने का बहाना बनाकर सौदा रद्द कर दिया और पैसे दबाकर बैठ गया।
पुलिस पंचायत में जब दोनों पक्षों का आमना-सामना हुआ, तो पंचायत ने कानूनी पेच और नैतिकता का पाठ पढ़ाया। नतीजा यह हुआ कि विपक्षी दल न केवल 15 लाख रुपये लौटाने को तैयार हुआ, बल्कि देरी के हर्जाने के तौर पर 2.5 लाख रुपये अतिरिक्त ब्याज देने पर भी सहमति बनी। न्याय पाकर बुजुर्ग महिला की आँखों में खुशी के आँसू छलक आए।
2. 'किराए' के दुख से मिला छुटकारा: अब अपने ही घर में रहेंगी मां
गंजबासौदा की एक वरिष्ठ नागरिक महिला को अपने ही बेटे-बहू के व्यवहार के कारण अपना मकान छोड़कर किराए पर रहना पड़ रहा था। यह मामला भावनात्मक और गंभीर था। पंचायत ने दोनों पक्षों को बिठाकर रिश्तों की अहमियत समझाई। अंततः यह समझौता हुआ कि मां अब अपने ही घर की ऊपरी मंजिल पर सम्मान के साथ रहेंगी और बेटा-बहू नीचे रहेंगे। पंचायत ने एक महीने बाद फिर से समीक्षा करने का फैसला लिया है ताकि मां को कोई तकलीफ न हो।
3. ट्रक की कमाई और हक की लड़ाई: भोपाल के ट्रांसपोर्टर ने तुरंत किया भुगतान
एक अन्य मामले में, एक महिला के दिवंगत पुत्र ने ट्रक बेचा था, लेकिन उसकी बकाया राशि पर पोता अनुचित दावा कर रहा था। पुलिस पंचायत ने भोपाल के संबंधित ट्रांसपोर्टर और सभी पक्षों को तलब किया। जब तथ्य साफ हुए, तो ट्रांसपोर्टर ने पंचायत के सामने ही बकाया राशि सीधे बुजुर्ग महिला के खाते में ट्रांसफर कर दी।
4. 40 हजार के बदले मांगे 6 लाख, अब देना होगा हिसाब
ग्रामीण क्षेत्र से आए एक मामले ने सबको सोच में डाल दिया। 10-12 साल पहले 40 हजार रुपये के बदले रखे गए गिरवी जेवर को छुड़ाने के लिए अब 6 लाख रुपये की मांग की जा रही थी। पंचायत ने इसे गंभीरता से लेते हुए अनावेदक को अगली पेशी पर सारे दस्तावेजी सबूतों के साथ हाजिर होने की चेतावनी दी है।
क्यों खास है विदिशा की पुलिस पंचायत?
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे के अनुसार, इस पहल का मकसद केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि 'सोशल पुलिसिंग' के जरिए समाज में समरसता लाना है। यहाँ कोर्ट-कचहरी के चक्करों से बचाकर आपसी सहमति से विवाद सुलझाए जाते हैं, जिससे समय और पैसा दोनों बचते हैं।
निष्कर्ष: विदिशा पुलिस की यह पहल साबित करती है कि अगर नीयत साफ हो, तो संवाद के जरिए हर समस्या का समाधान संभव है। चाहे वह जमीन का बड़ा विवाद हो या घर के भीतर की अनबन, पुलिस पंचायत आज विदिशा के आम जनमानस के लिए न्याय का सबसे सुलभ द्वार बन चुकी है।