
विदिशा/हैदरगढ़: विदिशा पुलिस (Vidisha Police) ने अपनी त्वरित कार्रवाई और साइबर टीम की मदद से एक बड़ी सफलता हासिल की है। 'विशेष मुस्कान अभियान' (Muskan Abhiyan) के तहत, हैदरगढ़ पुलिस ने मात्र 72 घंटों के भीतर एक नाबालिग लड़की (उम्र 15 साल 2 माह) को सुरक्षित दस्तयाब कर लिया है। पुलिस की इस तत्परता ने न सिर्फ परिवार की मुस्कान वापस लाई है, बल्कि अपराधियों को एक कड़ा संदेश भी दिया है।
तेज एक्शन: 72 घंटे में बच्ची सुरक्षित
यह मामला थाना हैदरगढ़ क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक नाबालिग बालिका के अपहरण की सूचना मिली थी। इस संबंध में तुरंत अपराध क्रमांक 118/25 के तहत धारा 137(2) बीएनएस के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।
विदिशा पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के सख्त निर्देशों और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे व एसडीओपी श्रीमती शिखा भलावी के मार्गदर्शन में, हैदरगढ़ पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया। टीम को बच्ची को जल्द से जल्द सुरक्षित लाने का लक्ष्य दिया गया।
साइबर टीम बनी गेम चेंजर
बच्ची को ढूंढने में साइबर टीम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। आधुनिक तकनीकी और डिजिटल फुटप्रिंट्स का इस्तेमाल करते हुए, टीम ने आरोपी और अपहृत बालिका के संभावित ठिकानों को ट्रैक किया।
हैदरगढ़ थाना प्रभारी उपनिरीक्षक के.के. पवार के नेतृत्व में गठित टीम ने दिन-रात एक कर दिया। इस अभियान की सफलता में निम्नलिखित पुलिसकर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा:
* थाना हैदरगढ़ टीम: उपनिरीक्षक के.के. पवार, सउनि. घनश्याम शास्ता, प्रधान आरक्षक 05 उदयवीर गुर्जर, आरक्षक 1076 रूपेश कुर्मी।
* साइबर टीम: उप निरीक्षक गौरव रघुवंशी, प्रधान आरक्षक रोहित रैकवार, आरक्षक रूपेश मेहता।
पुलिस की संयुक्त टीम ने अथक प्रयास करते हुए, 72 घंटों के भीतर बालिका को सुरक्षित ढूंढ निकाला और उसे उसके परिवार को सौंप दिया गया।
' मुस्कान अभियान' की महत्ता
विशेष 'मुस्कान अभियान' गुमशुदा और अपहृत बच्चों को खोजने के लिए चलाया जाता है। विदिशा पुलिस द्वारा इस तरह की त्वरित कार्रवाई करना यह दर्शाता है कि वे बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। पुलिस की यह सफलता समाज के लिए एक बड़ा भरोसा है कि संकट के समय वे हमेशा तत्पर हैं।
अधिकारियों ने बताया कि अब आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस तरह के अपराधों को अंजाम देने वालों को कड़ी सजा मिले।