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विदिशा में 'शराब' पर संग्राम: जब विधायक को ही अपनी सरकार के खिलाफ उतरना पड़ा सड़क पर!

2026-02-22  Editor Shubham Jain  226 views

ImgResizer_IMG-20260222-WA0044विदिशा: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में अवैध शराब के खिलाफ पनपा जनआक्रोश अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। जिले के छीरखेड़ा गांव में रविवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिलाओं ने शराब माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात तब रही, जब सत्ता पक्ष के कद्दावर नेता और विदिशा विधायक मुकेश टंडन खुद अपनी ही सरकार के प्रशासनिक तंत्र को चुनौती देते हुए महिलाओं के साथ प्रदर्शन में शामिल हो गए।

महिलाओं का हुंकार: “शराब बंद करो, घर बचाओ”

छीरखेड़ा गांव की गलियां आज नारों से गूंज उठीं। प्रदर्शनकारी महिलाओं का स्पष्ट आरोप है कि गांव में लंबे समय से बेखौफ होकर अवैध शराब बेची जा रही है। महिलाओं ने भारी मन से बताया कि अवैध शराब की उपलब्धता के कारण न केवल घर की शांति भंग हो रही है, बल्कि गांव के युवाओं का भविष्य भी अंधकार में जा रहा है। सामाजिक माहौल इस कदर बिगड़ चुका है कि अब महिलाओं का घर से निकलना भी दूभर होता जा रहा है।

विधायक का अनोखा विरोध: व्यवस्था पर सवाल या मजबूरी?

प्रदर्शन की खबर मिलते ही शासन के प्रतिनिधि विधायक मुकेश टंडन मौके पर पहुंचे। उन्होंने महिलाओं के दर्द को समझा और उनके साथ बैठकर अवैध शराब के कारोबार को जड़ से खत्म करने का आश्वासन दिया। विधायक ने कड़े शब्दों में कहा— "अवैध शराब का धंधा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।" उन्होंने तत्काल प्रभाव से संबंधित अधिकारियों को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए।

हालांकि, विधायक का यह कदम चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक गलियारों और स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल तैर रहा है कि:

> “अगर सत्ता पक्ष के विधायक को ही सड़क पर उतरना पड़ रहा है, तो फिर प्रशासन कर क्या रहा है? क्या पुलिस और आबकारी विभाग इतने लाचार हैं कि विधायक को खुद 'आंदोलनकारी' बनना पड़ रहा है?”

प्रशासनिक विफलता पर खड़े हुए गंभीर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासनिक तंत्र समय रहते अपना काम करता, तो आज महिलाओं को कामकाज छोड़ कर सड़क पर नहीं उतरना पड़ता। स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि विधायक का स्वयं विरोध में उतरना जिले के प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या यह अधिकारियों की लापरवाही है या फिर शराब माफियाओं को मिला हुआ कोई गुप्त संरक्षण?

चेतावनी: “अब आर-पार की लड़ाई”

ग्रामीणों ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यह विरोध प्रदर्शन तो महज एक झांकी है। यदि अगले कुछ दिनों के भीतर गांव से अवैध शराब की भट्टियां और ठिकाने पूरी तरह खत्म नहीं किए गए, तो आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जाएगा। ग्रामीण अब किसी खोखले आश्वासन के मूड में नहीं हैं, उन्हें धरातल पर ठोस कार्रवाई चाहिए।

अब देखना यह होगा कि विधायक के कड़े निर्देशों के बाद विदिशा पुलिस और आबकारी विभाग कितनी फुर्ती दिखाता है, या फिर यह 'जनआक्रोश' आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए बड़ी मुसीबत बनेगा।


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