विदिशा। पवित्र बेतवा नदी के दिन अब बहुरने वाले हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष पहल पर 'नमामि गंगे' परियोजना के तहत भारत सरकार की विशेषज्ञ टीम विदिशा पहुँच चुकी है। इस दौरे का एकमात्र लक्ष्य बेतवा को उसके पुराने स्वरूप में लौटाना और उसे पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाना है। टीम अब शहर के उन नालों और प्रदूषण के स्रोतों की कुंडली खंगाल रही है, जो सालों से नदी की निर्मलता को भंग कर रहे हैं।
इन तीन बड़े नालों पर टिकी टीम की नजर
सर्वेक्षण के पहले दिन विशेषज्ञ दल ने शहर के उन प्रमुख नालों का तकनीकी सर्वे किया, जो बेतवा में जहर घोल रहे हैं। इनमें चोरघाट नाला, गौशाला नाला और पीलिया नाला शामिल हैं। टीम ने मौके पर जाकर यह देखा कि इन नालों से कितना अपशिष्ट नदी में गिर रहा है और उन्हें आधुनिक तकनीक से कैसे रोका या उपचारित किया जा सकता है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का होगा विस्तार
विशेषज्ञों ने शहर में वर्तमान में चल रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का भी बारीकी से निरीक्षण किया। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि भविष्य की जनसंख्या और शहर के विस्तार को देखते हुए पुराने प्लांट नाकाफी साबित हो सकते हैं। इसलिए, नए हाई-टेक एसटीपी स्थापित करने और सीवेज प्रबंधन में दुनिया की लेटेस्ट टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
सिर्फ सफाई नहीं, तटों का सौंदर्यीकरण भी होगा
बेतवा और बैस नदी के संगम स्थल से लेकर नदी के बहाव क्षेत्र तक टीम ने जल गुणवत्ता का आकलन किया। इस महापरियोजना में केवल गंदगी साफ करना ही शामिल नहीं है, बल्कि:
नदी के किनारों पर सघन वृक्षारोपण करना।
नदी के घाटों का सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार।
नगर पालिका, जल संसाधन और जिला पंचायत के साथ मिलकर एक समेकित मास्टर प्लान लागू करना।
दिल्ली की टीम तैयार करेगी ‘मास्टर DPR’
इस महत्वपूर्ण टीम में भारत सरकार के जल संसाधन विभाग के निदेशक सियाम खान मुआन गुइटे, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के परियोजना प्रबंधक दुश्यंत सिंह चुंडावत और पर्यावरण अभियंता सुनील कुमार शामिल हैं। यह दल अब लगातार फील्ड में रहकर एक 'डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट' (DPR) तैयार करेगा। स्थानीय स्टाफ को भी विशेष तकनीकी ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि काम की क्वालिटी से कोई समझौता न हो।
जनता का सवाल: कब मिलेगी गंदगी से मुक्ति?
विगत कई वर्षों से विदिशा की जनता बेतवा की सफाई का इंतजार कर रही है। हालांकि केंद्र सरकार की इस सक्रियता ने नई उम्मीद तो जगाई है, लेकिन असल चुनौती समय पर काम पूरा होने की है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि कागजों पर तैयार होने वाली यह वृहद योजना धरातल पर कितनी जल्दी बेतवा की लहरों को शुद्ध बना पाती है।