
विदिशा संवाददाता।
विदिशा जिले में अब अवैध चिकित्सा संस्थानों और नीम-हकीमों का खेल खत्म होने वाला है। मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन से हो रहे खुले खिलवाड़ को गंभीरता से लेते हुए, जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। कलेक्टर अंशुल गुप्ता के सख्त निर्देशन पर, जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और वैधता सुनिश्चित करने के लिए 'सतत निरीक्षण अभियान' की शुरुआत कर दी गई है। इस अभियान के तहत, बुधवार को कुरवाई तहसील के सिहोरा गाँव में एक बड़ा प्रहार किया गया, जहाँ अवैधानिक रूप से संचालित हो रहे एक क्लिनिक को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।
कलेक्टर की चेतावनी: अवैध क्लिनिकों के खिलाफ होगी कठोरतम कार्यवाही
कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने जिले के सभी गैर-पंजीकृत और अनधिकृत चिकित्सा संचालकों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि जिले में अवैध चिकित्सा संस्थानों और बिना पंजीयन संचालित क्लिनिकों के विरुद्ध अब कठोरतम कार्यवाही की जाएगी।
कलेक्टर ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपनी सेहत के साथ कोई समझौता न करें। उपचार के लिए हमेशा केवल पंजीकृत, अधिकृत एवं विश्वसनीय चिकित्सालयों का ही चयन करें। प्रशासन का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि जिले के हर नागरिक को सही और सुरक्षित चिकित्सा सुविधाएँ मिलें।
सिहोरा क्लिनिक पर बड़ी कार्रवाई: एक्सपायरी दवाइयाँ मिलीं
प्रशासन को लगातार कुरवाई क्षेत्र में कुछ क्लिनिकों के अवैध संचालन की शिकायतें मिल रही थीं। इसी क्रम में, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की उपस्थिति में सिहोरा गाँव के एक संदिग्ध क्लिनिक की औचक जाँच की गई।
जाँच दल का नेतृत्व कर रहे तहसीलदार नागेश पवार ने इस कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि क्लिनिक में निरीक्षण के दौरान चौंकाने वाली अनियमितताएँ सामने आईं। क्लिनिक संचालक न तो अपनी प्रैक्टिस का कोई वैध पंजीयन प्रस्तुत कर सका और न ही क्लिनिक संचालन के आवश्यक मापदंड पूरे कर पाया।
सबसे खतरनाक बात यह थी कि जाँच में क्लिनिक के स्टोर और प्रयोग में लाई जा रही दवाइयों में बड़ी मात्रा में एक्सपायरी डेट की दवाइयाँ पाई गईं। तहसीलदार ने बताया कि “ये दवाइयाँ मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा थीं, जिन्हें डॉक्टर द्वारा मौके पर ही पंचनामा बनाकर जब्त कर लिया गया।”
मरीजों के स्वास्थ्य के प्रति इस घोर लापरवाही और नियमों के गंभीर उल्लंघन को देखते हुए, प्रशासन ने बिना किसी देरी के क्लिनिक को तात्कालिक प्रभाव से सील कर दिया। क्लिनिक संचालक के खिलाफ अब नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
क्यों जरूरी है यह अभियान?
अवैध रूप से संचालित ये क्लिनिक न केवल फर्जी और अनाधिकृत उपचार पद्धतियों का प्रयोग करते हैं, बल्कि घटिया, नकली या एक्सपायरी दवाइयों का उपयोग कर मरीजों के जीवन को खतरे में डालते हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में जहाँ स्वास्थ्य जागरूकता कम होती है, वहाँ ऐसे क्लिनिक भोले-भाले लोगों को आसानी से ठगते हैं।
प्रशासन के इस कदम से जिले के अन्य अवैध संचालकों में दहशत का माहौल है और यह स्पष्ट संदेश गया है कि स्वास्थ्य सुरक्षा के मामले में अब कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह अभियान लोगों के जीवन की सुरक्षा के लिए एक मजबूत नींव रखेगा और केवल योग्य व पंजीकृत चिकित्सा पेशेवरों को ही प्रैक्टिस की अनुमति मिलेगी।
आने वाले दिनों में यह निरीक्षण अभियान जिले के अन्य तहसीलों और कस्बों में भी जारी रहेगा। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे बिना किसी दबाव के, पूरी पारदर्शिता और सख्ती से जाँच कार्य को अंजाम दें। जिला प्रशासन की यह कार्रवाई चिकित्सा व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम है।
आगे की रणनीति
प्रशासन अब न सिर्फ ऐसे अवैध क्लिनिकों को बंद करवाएगा, बल्कि उनके संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी और जन-स्वास्थ्य को खतरे में डालने के आरोप में एफ.आई.आर. भी दर्ज करवाएगा। साथ ही, आम जनता को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान भी चलाया जाएगा ताकि वे अवैध संस्थानों के झांसे में न आएं।