
विदिशा से स्वाति श्रीवास्तव की रिपोर्ट। गुरुवार रात विदिशा शहर में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब मात्र तीन वर्ष की मासूम बालिका का अपहरण हो गया। यह घटना अग्रवाल धर्मशाला से शुरू हुई, जहां से एक अपराधी उस नन्हीं बच्ची को उठाकर विदिशा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार पर ले गया। उसकी मंशा मासूम को शहर से बाहर ले जाने की थी, लेकिन उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसकी खौफनाक साजिश पर जल्द ही पानी फिरने वाला है।
प्लेटफार्म पर बैठे डॉक्टर अंकित शर्मा और उनके साथी उस समय आराम कर रहे थे, जब उन्होंने एक बच्ची की रुलाई की आवाज सुनी। बच्ची उस अपहरणकर्ता की गोद में बुरी तरह रो रही थी। यह मंजर देख अंकित शर्मा को कुछ शक हुआ। उनकी सूझबूझ और फुर्ती से वे अपने साथियों के साथ अपराधी का पीछा करने लगे।
जैसे ही अपहरणकर्ता को आभास हुआ कि वह पकड़ा जा सकता है, वह बच्ची को छोड़कर भागने लगा। लेकिन वह अंकित और उनके साथियों की तत्परता के आगे बच नहीं पाया। उन्होंने तुरंत ही उसे दबोच लिया और जीआरपी थाने ले गए।
अंकित शर्मा और उनके साथियों की बहादुरी और त्वरित कार्रवाई की बदौलत उस मासूम बच्ची को सकुशल उसके परिवार से मिलाया जा सका। उनकी इस साहसिक पहल की हर ओर प्रशंसा हो रही है।
विदिशा के इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि जागरूकता और हिम्मत से बड़ी से बड़ी साजिश को नाकाम किया जा सकता है। डॉक्टर अंकित शर्मा और उनके साथियों की इस बहादुरी को सलाम!