VIDISHA BHARTI

collapse
...
Home / Politics/राजनीति / विदिशा जिला अस्पताल में बच्चा चोरी की कोशिश, परिजनों की सतर्कता से बची मासूम की जान

विदिशा जिला अस्पताल में बच्चा चोरी की कोशिश, परिजनों की सतर्कता से बची मासूम की जान

2025-05-05  Baby jain  841 views

ImgResizer_20250505_1713_23136
विदिशा जिला अस्पताल में बच्चा चोरी की कोशिश, परिजनों की सतर्कता से बची मासूम की जान

विदिशा, मध्य प्रदेश: विदिशा जिला अस्पताल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एनआरसी (न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर) वार्ड में भर्ती एक मासूम बच्ची को चुराने की कोशिश की गई। सौभाग्यवश, परिजनों की सतर्कता और तत्परता से बच्ची को बचा लिया गया और आरोपी महिला को रंगे हाथों पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।

घटना का पूरा विवरण

यह घटना गुरुवार की सुबह करीब 11 बजे की है जब ग्राम हिनोतिया निवासी लक्ष्मी अपनी एक साल की बच्ची के साथ एनआरसी वार्ड में भर्ती थीं। एनआरसी वार्ड में कुपोषण से ग्रसित बच्चों का उपचार और देखभाल की जाती है। इसी दौरान शेरपुर निवासी एक महिला, जिसकी पहचान उर्वशी के रूप में हुई है, अस्पताल में आई और वार्ड में दाखिल हो गई।

परिजनों के अनुसार, उर्वशी ने वार्ड में दाखिल होते ही लक्ष्मी की बच्ची को गोद में उठाया और तेज़ी से बाहर निकलने लगी। यह देख बच्ची की मां और अन्य परिजन चौंक गए और तुरंत महिला का पीछा कर उसे रोका। हंगामा होते ही अन्य लोग भी जमा हो गए और महिला को पकड़ लिया गया।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद एनआरसी वार्ड में हड़कंप मच गया। परिजनों और मरीजों ने अस्पताल प्रबंधन की लचर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। मौके पर मौजूद पोषण प्रशिक्षक स्वाति शर्मा ने बताया कि अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड उस वक्त अपनी ड्यूटी पर नहीं थे, जिससे यह गंभीर घटना घटित हुई।

स्वाति शर्मा का कहना है कि एनआरसी वार्ड में महिलाओं और बच्चों की देखभाल की जाती है, जहां बाहरी व्यक्ति का इस तरह से घुसना अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लगाता है। यदि समय रहते परिजन सजग न होते, तो मासूम बच्ची का अपहरण हो सकता था।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने तुरंत सुरक्षा कर्मियों को बुलाया और महिला को कोतवाली थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया। कोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज ने बताया कि महिला की मानसिक स्थिति संदिग्ध प्रतीत हो रही है। फिलहाल उसका मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसने यह कदम मानसिक असंतुलन के कारण उठाया या इसके पीछे कोई आपराधिक मंशा थी।

पुलिस ने आईपीसी की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। महिला के परिजनों से भी संपर्क किया जा रहा है ताकि उसकी मानसिक और सामाजिक स्थिति के बारे में अधिक जानकारी जुटाई जा सके।

परिजनों की सतर्कता बनी मासूम की रक्षा का कारण

इस पूरे घटनाक्रम में परिजनों की सतर्कता काबिले तारीफ रही। बच्ची की मां लक्ष्मी ने जैसे ही महिला को अपनी बच्ची को ले जाते हुए देखा, उन्होंने बिना देर किए शोर मचाया और अन्य लोगों की मदद से महिला को पकड़ लिया। यदि कुछ क्षण की भी देरी होती, तो न जाने क्या अनहोनी घट सकती थी।

अस्पताल प्रबंधन पर जनता की नाराजगी

घटना के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों ने विरोध दर्ज कराया। लोगों का कहना था कि अस्पताल में किसी भी समय कोई भी बाहर से अंदर आ सकता है, न कोई पूछताछ होती है और न ही पहचान पत्र दिखाने की जरूरत। इससे गंभीर सुरक्षा संकट उत्पन्न हो जाता है, खासकर जब एनआरसी जैसे संवेदनशील वार्ड की बात हो।

स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और जिला स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि अस्पताल की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। खासकर ऐसे वार्डों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए, सुरक्षा गार्डों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और आगंतुकों की एंट्री पर सख्ती बरती जाए।

समाज में बढ़ती चिंता

इस प्रकार की घटनाएं समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा करती हैं। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जन्म लेती हैं। अस्पताल जैसे स्थान, जहां लोग इलाज के लिए भरोसे के साथ आते हैं, वहां यदि इस प्रकार की घटनाएं होंगी तो जनता का विश्वास डगमगाएगा।

विदिशा जिला अस्पताल में हुई बच्चा चोरी की इस कोशिश ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चेतावनी दी है कि अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को गंभीरता से लेना होगा। यह तो परिजनों की सतर्कता थी जो बच्ची सुरक्षित बच गई, लेकिन यदि ऐसा न होता, तो एक परिवार की खुशियों पर भारी संकट आ सकता था।

इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ अस्पताल में तकनीकी और मानवीय सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना नितांत आवश्यक है। ताकि भविष्य में कोई मासूम ऐसी घटना का शिकार न हो।


Share:

26