
कहते हैं इश्क और जंग में सब जायज है, लेकिन उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक आशिक ने इस कहावत को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया। यहां माशूका का दिल जीतने और एक अमीर घराने में दामाद बनने की चाहत में एक युवक ने कानून को ही मजाक बना डाला। शादी की सनक ऐसी चढ़ी कि जनाब ने मेहनत कर वर्दी कमाने के बजाय, बाजार से खाकी वर्दी खरीद ली। एक साल नहीं, दो साल नहीं, बल्कि पूरे पांच साल तक यह 'नटवरलाल' फर्जी दरोगा बनकर समाज में रौब गांठता रहा। लेकिन कहते हैं ना कि झूठ के पांव नहीं होते, आखिरकार शाहजहांपुर पुलिस की मुस्तैदी ने इस 'फिल्मी दरोगा' की असलियत सामने ला ही दी।
चेकिंग के दौरान ऐसे चढ़ा पुलिस के हत्थे:
यह पूरा मामला फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है। शाहजहांपुर पुलिस हमेशा की तरह रूटीन वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान एक कार को रोका गया। कार में एक युवक बड़े ही टशन में सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) की वर्दी पहने और कैप लगाए बैठा था। पुलिस को देखकर भी उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, बल्कि वह असली पुलिसवालों पर ही रौब झाड़ने की कोशिश करने लगा।
जब पुलिसकर्मियों ने उससे पूछताछ शुरू की, तो उसने अपना नाम गौरव शर्मा बताया। उसने बड़े आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर है और उसकी वर्तमान पोस्टिंग लखीमपुर खीरी जिले में है। उसकी बातों में इतना विश्वास था कि एक पल को तो असली पुलिसवाले भी चकमा खा गए।
ASP की सूझबूझ ने खोला पांच साल पुराना राज:
मौके पर मौजूद एएसपी (ASP) दीक्षा भावरे को गौरव शर्मा के हाव-भाव और बातों पर कुछ संदेह हुआ। एक असली पुलिस अधिकारी की पारखी नजरों ने भांप लिया कि दाल में कुछ काला है। उन्होंने तुरंत लखीमपुर खीरी पुलिस से संपर्क साधा और गौरव शर्मा नाम के दरोगा के बारे में जानकारी मांगी।
लखीमपुर खीरी से जो जवाब आया, उसने सबके होश उड़ा दिए। वहां से बताया गया कि गौरव शर्मा नाम का कोई भी सब-इंस्पेक्टर पूरे जिले में तैनात नहीं है। सच सामने आते ही 'फर्जी दरोगा' का सारा रौब हवा हो गया। पुलिस ने जब कड़ाई से पूछताछ की, तो गौरव टूट गया और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
अमीर लड़की पटाने और टोल बचाने का था 'मास्टरप्लान':
पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद गौरव ने जो खुलासा किया, वह हैरान करने वाला था। उसने बताया कि उसकी शादी नहीं हो पा रही थी। उसे एक अमीर घर की लड़की को इम्प्रेस करना था और उसके परिवार वालों की नजरों में खुद को बड़ा अफसर साबित करना था, ताकि उसकी शादी किसी बड़े घर में हो सके। बस इसी 'आशिकी के भूत' ने उसे अपराधी बना दिया।
उसने बाजार से दरोगा की वर्दी, कैप और अन्य सामान खरीदा और खुद को सब-इंस्पेक्टर बताना शुरू कर दिया। पिछले पांच सालों से वह इसी फर्जी पहचान के सहारे जी रहा था। उसने यह भी बताया कि वर्दी पहनने का एक फायदा यह भी था कि उसे कहीं भी टोल टैक्स नहीं देना पड़ता था और लोग उसे सलाम ठोकते थे, जिससे उसका अहंकार और बढ़ता गया।
फिलहाल, शाहजहांपुर पुलिस ने इस 'फर्जी दरोगा' गौरव शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है और उसकी वर्दी व अन्य सामान जब्त कर लिया है। उसके खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। यह घटना एक सबक है कि झूठ की बुनियाद पर खड़ी की गई इमारत, चाहे वह रिश्तों की हो या रुतबे की, एक न एक दिन ढह ही जाती है।