केसली (सागर): "जैसे सूर्योदय होने पर कमल की पंखुड़ियां खिल उठती हैं, वैसे ही जब जीवन में गुरुओं का सानिध्य मिलता है, तो भक्तों का हृदय आनंद से सराबोर हो जाता है।" यह ओजस्वी विचार विश्व प्रसिद्ध शंका समाधान के प्रणेता, परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने केसली प्रवास के दौरान व्यक्त किए।
करीब 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद केसली की पावन धरा पर मुनि श्री का आगमन हुआ, जिससे संपूर्ण क्षेत्र में धर्म की गंगा बह निकली है। गुरुदेव के दर्शनों के लिए न केवल केसली, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
केसली की बदली तकदीर: याद आए पुराने दिन
मुनि श्री ने अपने संबोधन में पुरानी स्मृतियों को ताजा करते हुए कहा कि वे सबसे पहले सन् 1986 में गजरथ पंचकल्याणक महोत्सव के समय क्षुल्लक अवस्था में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के साथ यहां आए थे। उन्होंने आचार्य श्री के उन शब्दों को याद किया जब उन्होंने कहा था, “मैंने केसली का कैश ले लिया है।”
मुनि श्री ने कहा कि 1995 के बाद अब 2025 में आने पर केसली की पूरी तरह कायापलट हो चुकी है। उन्होंने भक्तों की अटूट भक्ति की प्रशंसा करते हुए कहा कि गुरुदेव की कृपा ने इस क्षेत्र की तकदीर बदल दी है।
धर्म का आलंबन ही मोक्ष का मार्ग
जीवन के विकास का सूत्र समझाते हुए मुनि श्री ने एक बेहद सुंदर उदाहरण दिया। उन्होंने कहा:
> “जिस प्रकार एक कोमल लता को आकाश की ऊंचाइयों को छूने के लिए एक मजबूत स्तंभ (सहारे) की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार मनुष्य को संसार रूपी दलदल से बचने के लिए 'धर्म' के आलंबन की जरूरत होती है। यदि लता को सहारा न मिले तो वह मिट्टी में सड़-गल कर नष्ट हो जाती है, वैसे ही धर्म के बिना इंसान विषयों के दलदल में फंसकर अपना अस्तित्व खो देता है।”
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मुनि श्री ने जोर देकर कहा कि "धर्म और धर्मी के प्रति अनुराग ही हमारे जीवन के विकास की गाथा लिखते हैं।" इसी अनुराग को 'श्रद्धा' कहा जाता है, और यही श्रद्धा मोक्ष मार्ग की पहली सीढ़ी है।
उत्साह का वातावरण और शंका समाधान
प्रवक्ता अविनाश जैन 'विद्यावाणी' ने बताया कि मुनिसंघ के आगमन को लेकर पूरे केसली ग्राम को तोरण द्वारों, केसरिया झंडों और भव्य रंगोलियों से सजाया गया था। युवाओं और बच्चों में गुरुदेव की अगवानी को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।
दोपहर के सत्र में विश्व प्रसिद्ध कार्यक्रम 'शंका समाधान' की रिकॉर्डिंग संपन्न हुई। आपको बता दें कि इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण प्रतिदिन शाम 6:20 बजे पारस चैनल, जिनवाणी चैनल और 'प्रमाणिक' ऐप पर किया जाता है। शंका समाधान के बाद मुनिसंघ ने मंगल विहार किया, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु 'नमोस्तु शासन जयवंत हो' के जयकारे लगाते हुए साथ चल रहे थे।