देवास। मध्य प्रदेश की देवास पुलिस ने डिजिटल इंडिया के दौर में मासूमों की गाढ़ी कमाई लूटने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एक संगठित गिरोह के 12 सदस्यों को दबोचा है, जिन्होंने पिछले महज 90 दिनों (3 महीने) के भीतर 7.5 करोड़ रुपये का काला कारोबार किया है। इस गिरोह का जाल इतना गहरा था कि इन्होंने ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए 78 फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया।
कैसे शुरू हुई जांच? 'रवि चौहान' की शिकायत ने खोला राज
इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत कोतवाली थाना क्षेत्र से हुई। फरियादी रवि चौहान ने पुलिस को ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। शुरुआती जांच में पुलिस को लगा कि यह एक सामान्य धोखाधड़ी है, लेकिन जैसे-जैसे कड़ियां जुड़ीं, एक विशाल वित्तीय अपराध का चेहरा सामने आ गया।
जांच में पता चला कि यह गिरोह स्थानीय गरीब और भोले-भाले लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। मुख्य रूप से यूको बैंक (UCO Bank) और बैंक ऑफ महाराष्ट्र में ये खाते खुलवाए गए थे।
ठगी का 'मोडस ऑपरेंडी': बैंक खाते से डिजिटल करेंसी तक का खेल
पुलिस की पूछताछ में जो तरीका सामने आया, उसने तकनीकी विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। गिरोह के काम करने का तरीका कुछ इस प्रकार था:
* खातों की खरीद: स्थानीय लोगों को लालच देकर खाते खुलवाना।
* कब्जा: खाता खुलते ही उसकी पासबुक, एटीएम कार्ड और लिंक्ड सिम कार्ड गिरोह के सरगना अपने पास रख लेते थे।
* रकम का ट्रांजेक्शन: देशभर में होने वाली साइबर ठगी का पैसा इन 78 खातों में मंगवाया जाता था।
* क्रिप्टो कनेक्शन: आरोपियों ने इस पैसे को सफेद करने के लिए Binance और Bybit जैसे अंतरराष्ट्रीय डिजिटल करेंसी ऐप्स का सहारा लिया।
* टेलीग्राम का जाल: डिजिटल करेंसी (USDT/Bitcoin) खरीदकर इसे टेलीग्राम के जरिए ऊंचे दामों पर अन्य साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था।
78 बैंक खाते और करोड़ों का ट्रांजेक्शन
देवास पुलिस ने जब इन खातों की डिटेल खंगाली, तो पता चला कि एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल पर इन खातों के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों से कई शिकायतें पहले से ही दर्ज थीं। केवल 3 महीने में 7.5 करोड़ का ट्रांजेक्शन इस बात का सबूत है कि यह गिरोह कितनी सक्रियता से काम कर रहा था।
कानूनी कार्रवाई और पुलिस की अपील
देवास पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोतवाली थाने में अपराध क्रमांक 897/2025 दर्ज किया है। इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 316(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
देवास एसपी ने प्रेस वार्ता में बताया:
> "हमने 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन यह तो बस शुरुआत है। इस गिरोह के तार अन्य राज्यों और संभवतः विदेशों से भी जुड़े हो सकते हैं। हम डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।"
>
साइबर फ्रॉड से कैसे बचें? (पाठकों के लिए विशेष टिप्स)
* किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता न खोलें।
* अपना एटीएम, पिन या सिम कार्ड किसी को किराए पर न दें।
* जल्द अमीर बनने के लालच में आकर अपनी निजी जानकारी साझा न करें।