
राजगढ़। प्यार का जादू कब, कहां, और किस पर चले, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। ऐसा ही एक दिलचस्प और चौंकाने वाला मामला मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने पति और समाज के बंधनों को तोड़कर ऐसा कदम उठाया कि हर कोई हैरान रह गया। 4 बच्चों की मां का दिल अपने ही देवर पर ऐसा आया कि वह पति और बड़े बेटे को छोड़कर देवर के साथ "नौ दो ग्यारह" हो गई।
प्यार का नया अध्याय
6 साल पहले मुकेश की शादी खिलचीपुर की रहने वाली लड़की से हुई थी। शादी के शुरुआती साल तो खुशहाल बीते, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, रिश्तों में दूरियां बढ़ने लगीं। चार बच्चों की मां बन चुकी महिला का दिल अपने ही देवर पर आ गया। धीरे-धीरे दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ा, और उन्होंने एक नया जीवन शुरू करने का फैसला कर लिया। महिला अपने तीन बच्चों को लेकर देवर के साथ राजस्थान भाग गई, जबकि सबसे बड़ा बेटा पिता के पास ही रह गया।
थाने से समाज तक बवाल
पति को जब इस घटना का पता चला, तो उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महिला और उसके देवर को राजस्थान से खोज निकाला। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब महिला ने थाने में ही सबके सामने अपने पति को छोड़ने और देवर के साथ जिंदगी बिताने का ऐलान कर दिया।
आरोप और आक्रोश
महिला का कहना था कि उसका पति उसके साथ मारपीट करता था और वह इस रिश्ते से परेशान होकर ऐसा कदम उठाने पर मजबूर हुई। हालांकि, इस फैसले से न सिर्फ रिश्तेदार, बल्कि गांव वाले भी भड़क गए। गांव के लोगों ने देवर को "समाज का कलंक" करार देते हुए उसे बहिष्कृत कर दिया।
मोहब्बत या बगावत?
यह मामला केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि समाज, रिश्ते और जिम्मेदारियों पर गहरी बहस छेड़ता है। क्या यह महिला का अपने दिल की सुनने का साहस था, या परिवार और समाज की जिम्मेदारियों से भागने का कदम?
आप क्या सोचते हैं?
क्या प्यार के लिए रिश्तों की कुर्बानी जायज है, या यह परिवार को तोड़ने वाली एक गलती? यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि दिल की सुने या समाज की?