
डेस्क….उत्तर प्रदेश के झांसी में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए। शहर कोतवाली क्षेत्र की पंचवटी शिव परिवार कॉलोनी में 27 वर्षीय सोनाली बुधौलिया की मौत को उसके पति ने आत्महत्या करार दिया था। लेकिन इस कहानी में चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब उनकी 4 साल की मासूम बेटी दृश्यता ने जो देखा था, वो पुलिस को बताया।
मासूम के शब्दों ने उड़ा दिए होश
मां के अंतिम संस्कार के बाद दृश्यता ने मासूमियत से कहा, "मैंने मम्मा का अंतिम संस्कार किया, क्योंकि पापा नहीं आए। पापा ने मम्मा को मार दिया था, इसलिए वह नहीं आए।" बच्ची के ये शब्द सुनते ही पुलिस भी सन्न रह गई।
खौफनाक सच की तस्वीर बनाई मासूम ने
दृश्यता ने अपनी मां की मौत का दृश्य एक कागज पर उकेर दिया। उस चित्र में उसकी मां फांसी पर झूल रही थी, लेकिन फंदे के पास एक हाथ और बना था। जब पुलिस ने पूछा, "ये हाथ किसका है?" तो बच्ची ने निश्छलता से जवाब दिया, “पापा का। पापा ने मम्मा को मारा और फिर उन्हें फांसी पर लटका दिया।”
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गिरफ्तारी
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने सोनाली के पति संदीप बुधौलिया को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में संदीप ने दावा किया कि दोनों के बीच झगड़े होते थे और इसी कारण सोनाली ने आत्महत्या की।
मासूम का आक्रोश: ‘मम्मा को हाथ लगाओगे तो तोड़ दूंगी’
मासूम दृश्यता ने अपनी मासूमियत में ही अपनी ताकत भी दिखाई। उसने कहा, "मैंने पापा से कहा था कि मम्मा को हाथ लगाओगे तो तोड़ दूंगी।" उसकी ये बात सुनकर सबकी आंखें नम हो गईं।
दहेज की मांग और घरेलू हिंसा की दर्दनाक कहानी
सोनाली के पिता ने रोते हुए बताया कि शादी के समय 20 लाख रुपए नकद, अंगूठी और जंजीर दी थी, लेकिन ससुराल वाले चार पहिया गाड़ी की मांग करने लगे। जब उन्होंने मना किया तो सोनाली पर अत्याचार बढ़ गए। बेटी के जन्म पर भी उसे ताने दिए गए और अकेला छोड़ दिया गया।
मां की मौत का सच उजागर करने वाली बेटी को न्याय मिलेगा?
4 साल की मासूम दृश्यता ने अपनी मां की हत्या का जो सच सामने लाया है, उसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। क्या इस मासूम की गवाही सोनाली को न्याय दिला पाएगी? क्या संदीप को उसकी क्रूरता की सजा मिलेगी? पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन इस मासूम की मासूमियत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि उस सामाजिक बुराई की भी है, जहां दहेज और बेटे की चाहत के चलते एक और बेटी को अनाथ कर दिया गया। न्याय की इस लड़ाई में अब देखना है कि मासूम दृश्यता की आवाज कब और कैसे गूंजती है।