
इंदौर। मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर से एक बेहद चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। शहर के नंदलालपुरा क्षेत्र में बुधवार (तारीख) को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब किन्नरों के एक समूह ने सामूहिक रूप से जहर पी लिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, लगभग 30 किन्नरों ने यह खतरनाक कदम उठाया है। घटना के बाद इनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।
आपसी विवाद बना जहर पीने की वजह?
यह पूरी घटना किन्नर समुदाय के दो गुटों के बीच चल रहे गहरे और लंबे समय से चले आ रहे विवाद का परिणाम बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, नंदलालपुरा क्षेत्र में दोनों गुटों के बीच कई दिनों से तनाव चल रहा था। इस बीच एक गुट के सदस्यों ने हताश होकर एक साथ जहर (संभवतः फिनाइल) पी लिया। यह खबर मिलते ही पूरे शहर में सनसनी फैल गई।
पुलिस और प्रशासन में मचा हड़कंप
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। आनन-फानन में पुलिस और एम्बुलेंस के वाहनों के जरिए गंभीर हालत वाले किन्नरों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पुलिस फिलहाल इस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना के पीछे के वास्तविक कारणों की पुष्टि कर रही है। हालांकि, पुलिस सूत्रों ने सामूहिक रूप से जहर पीने की घटना को किन्नरों के आपसी विवाद से जुड़ा होना बताया है।
कुकर्म के मामले ने पकड़ा था तूल, SIT भी हुई थी निष्क्रिय
किन्नरों के बीच यह विवाद केवल संपत्ति या वर्चस्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने हाल ही में एक और गंभीर मोड़ ले लिया था। जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले ही इस आपसी विवाद के चलते एक मीडियाकर्मी पर एक किन्नर के साथ कुकर्म करने का मामला दर्ज हुआ था। इस मामले ने भी काफी तूल पकड़ा था और किन्नर समुदाय में भारी आक्रोश था।
गौरतलब है कि किन्नरों के इस अंतर्द्वंद को शांत करने के लिए पूर्व में पुलिस प्रशासन द्वारा एक विशेष जांच दल (SIT) का भी गठन किया गया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि एक बड़े अधिकारी के तबादले के बाद यह SIT भी निष्क्रिय हो गई और विवाद को सुलझाने में कोई खास प्रगति नहीं हुई। नतीजतन, कई दिनों से लंबित और अनसुलझा विवाद आज इस बड़े और दुखद घटनाक्रम में बदल गया।
कानून व्यवस्था पर उठे सवाल
इंदौर जैसे मेट्रो शहर में 30 लोगों का एक साथ ऐसा आत्मघाती कदम उठाना, कानून-व्यवस्था और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस विवाद को एसआईटी के गठन के बावजूद नहीं सुलझाया जा सका, उसकी वजह से आज इतने लोगों की जान खतरे में है। यह घटना दर्शाती है कि समाज के इस संवेदनशील वर्ग के मुद्दों को सुलझाने में कहीं न कहीं प्रशासनिक स्तर पर भारी चूक हुई है। पुलिस को अब न केवल सामूहिक रूप से जहर पीने की घटना की जांच करनी होगी, बल्कि किन्नरों के बीच लंबे समय से चल रहे इस विवाद की जड़ तक भी पहुंचना होगा, ताकि भविष्य में इस तरह की भयावह घटनाओं को रोका जा सके। अस्पताल में भर्ती किन्नरों के स्वास्थ्य पर लगातार नज़र रखी जा रही है और पुलिस उनके बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है।