
दुर्ग, छत्तीसगढ़: एक सुखमय दांपत्य जीवन की शुरुआत 28 अप्रैल 2016 को बरखा वासनिक और शीशपाल वासनिक के विवाह से हुई थी। लेकिन ये शादी सपनों का महल नहीं, बल्कि दर्द और पीड़ा का कारण बन गई। शादी के महज एक दिन बाद ही पति शीशपाल ने दहेज के नाम पर विवाद शुरू कर दिया, जिसकी परिणति बरखा की हत्या तक पहुंच गई।
शादी के तुरंत बाद शुरू हुआ अत्याचार
परिवार वालों के अनुसार, शीशपाल लगातार 4 लाख रुपये के दहेज की मांग कर रहा था। दबाव बढ़ने पर बरखा के मायके वालों ने पहले चरण में 70 हजार रुपये भी दिए, लेकिन शोषण और प्रताड़ना का सिलसिला रुका नहीं। दल्लीराजहरा में कुछ समय तक दोनों साथ रहे, लेकिन वहां भी बरखा को प्रतिदिन मारपीट का सामना करना पड़ा। बरखा की बहन ने उसकी मारपीट की शिकायत की प्रति पुलिस को सौंपी है, जिसमें अत्याचार की गंभीरता स्पष्ट रूप से सामने आई है।
दो मासूमों से छिन गई मां की ममता
बरखा के भाई शुभम कुटारे ने बताया कि बरखा के दो छोटे बच्चे हैं—बेटा अरियांश, जो अभी पहली कक्षा में पढ़ता है और बेटी नव्या, जो दूसरी कक्षा में है। वर्तमान में दोनों अपने नानी के पास, नया आमापारा दुर्ग में रह रहे हैं। शुभम भावुक होते हुए कहते हैं, “बच्चों को कभी पिता का प्यार नहीं मिला। अब मां भी उनसे छिन गई। उनके जीवन में ममता और स्नेह की छांव खत्म हो चुकी है।”
हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस
इस जघन्य हत्या की जांच में दल्लीराजहरा की सीएसपी डॉ. चित्रा वर्मा के नेतृत्व में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। हत्या के आरोप में शीशपाल वासनिक और कयामुद्दीन को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने कई अहम सबूत बरामद किए हैं।
इनमें वारदात में प्रयुक्त बोलेरो गाड़ी, हत्या में इस्तेमाल की गई लोहे की रॉड, दोनों के मोबाइल फोन और संपर्क में आए मोबाइल नंबरों की सूची शामिल है। ये सारे सबूत हत्या की योजना और उसमें शामिल लोगों की संलिप्तता को उजागर कर रहे हैं।
महिला सुरक्षा पर फिर उठा सवाल
इस मामले ने एक बार फिर महिला सुरक्षा और दहेज प्रथा की भयावहता को उजागर कर दिया है। शादी के बाद महिलाओं के साथ हो रही प्रताड़ना और कानून के डर के बिना चल रही ऐसी घटनाएं समाज में चिंता का विषय बन गई हैं।
दहेज के लालच में बरखा जैसे न जाने कितनी महिलाएं अपनी जान गंवा रही हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक महिलाएं इस मानसिक, शारीरिक और सामाजिक अत्याचार का शिकार होती रहेंगी?
आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ हत्या का मामला
सीएसपी डॉ. वर्मा ने पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी शीशपाल वासनिक और उसके साथी कयामुद्दीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया है। दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और आगे की पूछताछ जारी है।
जांच टीम उन मोबाइल नंबरों और कॉल डिटेल्स की भी छानबीन कर रही है जो वारदात के समय दोनों आरोपियों के संपर्क में थे। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस हत्या में और भी कोई शामिल था या फिर यह पूरी तरह से दोनों की योजना थी।
न्याय की आस, लेकिन दर्द बाकी है
बरखा के परिवार को न्याय की उम्मीद तो है, लेकिन जो जख्म उन्हें मिला है, वह कभी नहीं भर सकता। दो मासूम बच्चों के चेहरे पर मां की ममता की छाया हमेशा के लिए खत्म हो गई है।
इस हृदयविदारक घटना ने समाज को फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर क्यों और कब तक बेटियां दहेज के नाम पर यूं ही कुर्बान होती रहेंगी?