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तीसरी बेटी के जन्म पर पत्नी को जिंदा जलाया:रूह कंपा देने वाली वारदात

2024-12-28  Editor Shubham Jain  426 views

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महाराष्ट्र के परभणी जिले के गंगाखेड़ नाका इलाके में एक ऐसी घटना घटी जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। 26 दिसंबर की रात, एक निर्दयी पति ने अपनी पत्नी को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया। वजह? वह तीसरी बार बेटी की मां बनी थी। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।

जब मां का दर्जा सजा बन गया 34 वर्षीय मैना कुंडलिक काले का अपराध सिर्फ इतना था कि उसने तीन बेटियों को जन्म दिया। समाज में बेटियों के खिलाफ गहरी बैठी संकीर्ण मानसिकता का नतीजा उसकी मौत के रूप में सामने आया। पीड़िता की बहन ने बताया कि आरोपी पति कुंडलिक उत्तम काले, बेटियों के जन्म को अपनी बदनामी मानता था। उसने कई बार मैना पर बेटे की चाहत का दबाव डाला था।

घटना की रात का मंजर:
वारदात वाली रात, पति-पत्नी के बीच बहस हुई, जो अचानक हिंसा में बदल गई। गुस्से में कुंडलिक ने पेट्रोल लाकर मैना पर डाल दिया और माचिस से आग लगा दी। जलती हुई मैना मदद की गुहार लगाते हुए घर से बाहर भागी। उसकी चीखें सुनकर पड़ोसी इकट्ठा हुए और आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक मैना बुरी तरह झुलस चुकी थी। अस्पताल ले जाने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।

सीसीटीवी में कैद हुई दरिंदगी यह भयानक घटना पास के एक सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में मैना को आग की लपटों में घिरे भागते देखा जा सकता है। इस वीडियो ने लोगों को झकझोर दिया है और समाज के सामने बेटी और मां के प्रति भेदभावपूर्ण सोच पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने आरोपी कुंडलिक को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। जांच अधिकारी का कहना है कि मामले की तह तक जाने के लिए विस्तृत जांच जारी है।

इलाके में गुस्से की लहर इस क्रूर घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया है। स्थानीय लोग इस घटना की कड़ी निंदा कर रहे हैं और दोषी को फांसी देने की मांग कर रहे हैं। एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “यह घटना बताती है कि हमारे समाज में बेटियों को लेकर अभी भी कितनी घृणित मानसिकता मौजूद है। इसे बदलने की जरूरत है।”

समाज को सीखने की जरूरत यह घटना न केवल एक हत्या है, बल्कि हमारे समाज की उन जड़ों को उजागर करती है, जहां बेटियों को अभी भी बोझ माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सोच को खत्म करने के लिए शिक्षा, जागरूकता और महिलाओं के प्रति सम्मान का माहौल बनाना बेहद जरूरी है।

क्या बदलाव संभव है?

आज यह सवाल उठता है कि बेटा और बेटी में भेदभाव कब तक चलेगा? यह घटना हर व्यक्ति को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम वास्तव में एक प्रगतिशील समाज की ओर बढ़ रहे हैं, या केवल दिखावे की दुनिया में जी रहे हैं?

मैना की मौत केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। जब तक बेटियों को बराबरी का दर्जा और सम्मान नहीं मिलेगा, ऐसी घटनाएं हमें बार-बार शर्मिंदा करती रहेंगी।


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