
मऊगंज जिले के नईगढ़ी संकुल अंतर्गत सेधी गांव में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर लोग हैरान हैं। यहां एक परिवार की जिंदगी शिक्षकों की लापरवाही की वजह से मुश्किल में पड़ गई है। सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज गलत जन्मतिथियों ने ऐसा भ्रामक स्थिति पैदा कर दी कि माता-पिता कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
शादी से पहले बच्चा और शादी के तुरंत बाद दूसरा!
सरोज सिंह, जो सेधी गांव के निवासी हैं, ने जब अपने बच्चों के स्कूल रिकॉर्ड देखे, तो उनके होश उड़ गए। सरकारी मार्कशीट में उनके पहले बच्चे की जन्मतिथि 8 अगस्त 2007 और दूसरे बच्चे की 7 सितंबर 2008 दर्ज की गई है। हैरानी की बात यह है कि सरोज की शादी 10 जुलाई 2008 को हुई थी। इसका मतलब यह हुआ कि पहला बच्चा शादी से एक साल पहले और दूसरा शादी के एक महीने बाद ही पैदा हो गया! 
स्कूल की मनमानी से मची आफत
सरोज सिंह ने बताया कि जब बच्चों का एडमिशन किया गया, तो घर पर मौजूद न होने की वजह से शिक्षकों ने अपनी मर्जी से जन्मतिथि दर्ज कर दी। चार महीने पहले जब वे बच्चों का टीसी लेने स्कूल पहुंचे, तो इस बड़ी गलती का खुलासा हुआ।
कलेक्टर कार्यालय के चक्कर और अफसरों की मुस्कान
सरोज सिंह अब कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। अधिकारियों को यह मामला जितना हास्यास्पद लग रहा है, परिवार के लिए उतना ही परेशान करने वाला है। उनका कहना है कि यह गलती न केवल उनके बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है, बल्कि समाज में भी उनके लिए शर्मिंदगी का कारण बन रही है।
वास्तविक जन्मतिथि
सरोज सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका पहला बच्चा 15 फरवरी 2010 और दूसरा 27 फरवरी 2011 को पैदा हुआ था।
क्या कार्रवाई होगी?
इस अजीबोगरीब मामले ने सरकारी स्कूलों में कामकाज की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अब देखना यह होगा कि इस गलती को सुधारने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।