
रायसेन। डिजिटल युग में जहाँ एक ओर सुविधाएँ बढ़ी हैं, वहीं साइबर अपराधियों के हौसले भी बुलंद हो गए हैं। ताजा मामला मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से सामने आया है, जहाँ जालसाजों ने सीधे जिले के मुखिया यानी कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा को ही अपना निशाना बना लिया है। किसी अज्ञात जालसाज ने कलेक्टर के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर एक फर्जी फेसबुक आईडी (Fake Facebook ID) तैयार की है और लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज रहा है।
क्या है पूरा मामला?
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक फेसबुक प्रोफाइल तेजी से चर्चा में है, जिसमें रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा की फोटो और नाम का उपयोग किया गया है। यह फर्जी आईडी बनाकर अज्ञात व्यक्ति द्वारा जिले के नागरिकों, कर्मचारियों और अन्य लोगों को धड़ाधड़ फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी जा रही है। मामला तब उजागर हुआ जब कुछ जागरूक लोगों ने कलेक्टर के नाम से आई इस अचानक रिक्वेस्ट पर संदेह जताया।
माना जा रहा है कि इस फर्जी आईडी के पीछे किसी बड़े साइबर फ्रॉड की साजिश हो सकती है। अक्सर ऐसे मामलों में जालसाज पहले फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं और फिर मजबूरी का हवाला देकर या किसी इमरजेंसी की बात कहकर पैसों की मांग करते हैं।
जनसंपर्क विभाग (PRO) ने जारी की चेतावनी
जैसे ही यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आया, रायसेन के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (PRO) की ओर से तुरंत आधिकारिक जानकारी साझा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा द्वारा ऐसी कोई नई आईडी नहीं बनाई गई है और न ही वे व्यक्तिगत रूप से इस तरह किसी को रिक्वेस्ट भेज रहे हैं।
PRO ने अपील की है कि:
* यदि आपके पास रायसेन कलेक्टर के नाम से कोई फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है, तो उसे एक्सेप्ट (Accept) न करें।
* प्रोफाइल को तुरंत रिपोर्ट करें ताकि फेसबुक उसे ब्लॉक कर सके।
* किसी भी स्थिति में सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्ति (चाहे वह वीआईपी प्रोफाइल ही क्यों न हो) द्वारा मांगे जाने पर पैसे ट्रांसफर न करें।
साइबर ठगों के निशाने पर वीआईपी प्रोफाइल
यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े अधिकारी के नाम का दुरुपयोग हुआ हो। इससे पहले भी कई जिलों के कलेक्टर और एसपी की फर्जी प्रोफाइल बनाकर ठगी के प्रयास किए जा चुके हैं। साइबर अपराधी "इम्पर्सनेशन" (भेष बदलना) तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें आर्थिक चपत लगाते हैं।
रायसेन पुलिस की साइबर सेल अब इस फर्जी आईडी को बनाने वाले अज्ञात आरोपी की तलाश में जुट गई है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी की भी पहचान को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
आप कैसे सुरक्षित रहें?
* प्रोफाइल वेरिफाई करें: किसी भी अधिकारी की आईडी चेक करते समय देखें कि वह कब बनी है और उस पर किस तरह का कंटेंट पोस्ट है।
* निजता का ध्यान रखें: अपनी फ्रेंड लिस्ट को प्राइवेट रखें ताकि ठग आपके दोस्तों को निशाना न बना सकें।
* शिकायत करें: अगर आपको कोई फर्जी आईडी मिलती है, तो उसे [संदिग्ध लिंक हटा दिया गया] पर रिपोर्ट करें।
रायसेन प्रशासन ने जनता से अनुरोध किया है कि वे इस खबर को अधिक से अधिक साझा करें ताकि कोई भी मासूम इस साइबर जालसाजी का शिकार न हो सके।