
वसीम कुरेशी सांची। यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर और पर्यटन का केंद्र, सांची, इस समय एक बड़े स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। जहां एक ओर यह नगर दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है, वहीं यहां का सिविल अस्पताल खुद ही 'बीमार' पड़ा है। अस्पताल में लगी एक्स-रे मशीन पिछले डेढ़ महीने से धूल फांक रही है, जिसके चलते प्रतिदिन दर्जनों मरीजों को अपनी जेबें ढीली करनी पड़ रही हैं और उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
डेडिकेटेड मशीन, डेड-एंड सुविधा!
सांची के सिविल अस्पताल की यह अव्यवस्था सरकारी स्वास्थ्य दावों की पोल खोल रही है। जानकारी के मुताबिक, यह एक्स-रे मशीन पिछले 45 दिनों से अधिक समय से ख़राब पड़ी है। हड्डी टूटने, गंभीर चोटों या आंतरिक जांच के लिए एक्स-रे सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण सुविधा होती है, और इसका लंबे समय तक बंद रहना, सीधे तौर पर आम जनता के जीवन से खिलवाड़ है।
अस्पताल प्रशासन ने यह स्वीकार किया है कि मशीन खराब होने की सूचना उच्च अधिकारियों को कई बार भेजी जा चुकी है। बावजूद इसके, न तो युद्धस्तर पर मशीन की मरम्मत कराई गई है और न ही मरीजों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। इस लापरवाही का खामियाजा सांची और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
मजबूरी का फायदा: निजी क्लीनिकों की चांदी
सरकारी अस्पताल में सुविधा न मिलने के कारण मरीजों को मजबूरन निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है। इन निजी क्लीनिकों पर जांच की दरें सरकारी दर से कई गुना अधिक होती हैं, जो खासकर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए आर्थिक बोझ बन गई हैं।
बुजुर्ग रामलाल पटेल, जिन्हें चोट लगने के बाद एक्स-रे की जरूरत थी, उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा, "सरकारी अस्पताल में भरोसा करके आते हैं कि कम खर्च में इलाज मिल जाएगा, लेकिन यहां पता चला कि मशीन ही बंद है। बाहर प्राइवेट में तीन गुना ज्यादा पैसा लगा, और वो भी उधार लेकर चुकाना पड़ा।" यह केवल रामलाल की कहानी नहीं है, ऐसे दर्जनों मामले प्रतिदिन सामने आ रहे हैं।
पर्यटन सीजन और 'स्वास्थ्य मेला' की चिंता
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में इस लापरवाही को लेकर गहरा आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि जब सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की बात करती है, तब सांची जैसे अंतर्राष्ट्रीय महत्व वाले नगर का सिविल अस्पताल इस तरह अव्यवस्था का शिकार क्यों है?
इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन की प्रतिक्रिया भी सवालों के घेरे में है। अस्पताल के बी एम ओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) रवि राठौर ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वीकार किया, “तकनीकी खराबी होने के कारण एक्स-रे मशीन बंद है। इसकी कैसेट बाहर से आती है, हमने इसकी शिकायत पत्राचार के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दी है। हम भी चाहते हैं जल्द से जल्द ठीक हो जाए क्योंकि सांची में सांची स्तूप का मेला भी आ रहा है।”
बीएमओ का यह बयान हालांकि जल्द सुधार की उम्मीद जगाता है, लेकिन यह सवाल जस का तस है कि इतने महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल पर, जहां हमेशा पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही रहती है, वहां एक बुनियादी सुविधा को डेढ़ महीने से नजरअंदाज क्यों किया गया? सांची स्तूप का मेला निकट है और यदि यह स्वास्थ्य सुविधा बहाल नहीं होती है, तो आने वाले समय में यह अव्यवस्था एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।
जिम्मेदारों की यह लापरवाही और चुप्पी अब स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ रही है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि वह तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करे और एक्स-रे मशीन को शीघ्रातिशीघ्र चालू करवाए।
सवाल: क्या सरकार केवल कागजों पर स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ कर रही है, या जमीनी हकीकत पर भी ध्यान देगी? सांची के सिविल अस्पताल को कब 'स्वास्थ्य' मिलेगा?