
विदिशा, ग्यारसपुर। क्या हाईवे किनारे शराब की दुकानें मौत को न्यौता दे रही हैं? यह सवाल तब उठा जब मजदूर संघ यूनियन ने ग्यारसपुर स्थित नेशनल हाईवे 146 से शराब की दुकानों को हटाने के लिए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। यूनियन का आरोप है कि इन दुकानों की वजह से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं और लोगों की जान खतरे में है।
हादसों का कारण बन रहीं शराब दुकानें
मजदूर संघ यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष रघुवीर सिंह सिसोदिया ने ज्ञापन में बताया कि ग्यारसपुर मुख्यालय पर हाईवे किनारे दो देशी और विदेशी शराब की दुकानें सालों से चल रही हैं। इस हाईवे पर चौबीसों घंटे भारी वाहनों का आवागमन रहता है, जिसके चलते यहां हमेशा चहल-पहल रहती है। लेकिन, इन दुकानों से शराब खरीदकर लोग अक्सर नशे की हालत में सड़क पर आ जाते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं।
सिसोदिया ने कहा कि इन हादसों में कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि आखिर हाईवे पर ऐसी दुकानें चलाने की अनुमति क्यों दी गई है, जो सीधे-सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ कर रही हैं?
मंदिर और पेट्रोल पंप के पास खतरा
ज्ञापन में एक और गंभीर पहलू का उल्लेख किया गया है। जिस जगह ये शराब की दुकानें हैं, वहीं पास में एक मंदिर भी स्थित है। पूजा-पाठ के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को भी इस कारण काफी परेशानी होती है। शराबियों के जमावड़े से यहां का माहौल खराब रहता है और महिलाएं और परिवार के लोग असहज महसूस करते हैं।
इससे भी बड़ा खतरा यह है कि शराब की दुकान एक पेट्रोल पंप के ठीक बगल में है। ऐसे में किसी भी समय कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। नशे की हालत में जरा सी लापरवाही भयानक आग का कारण बन सकती है। सिसोदिया ने कहा कि प्रशासन को तुरंत इस खतरे को गंभीरता से लेना चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी
मजदूर संघ यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष रघुवीर सिंह सिसोदिया ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर इन शराब की दुकानों को जल्द से जल्द दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया गया, तो मजदूर संघ यूनियन सड़क पर उतरकर जोरदार आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करेगी। यह सिर्फ शराब की दुकान हटाने का मामला नहीं है, बल्कि यह लोगों की सुरक्षा का सवाल है।
उन्होंने कहा कि यूनियन अपने सदस्यों और आम जनता की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इस मुद्दे पर प्रशासन का अगला कदम क्या होगा, यह देखना बाकी है, लेकिन मजदूर संघ के इस कदम ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है।