
सीधी, मध्य प्रदेश। सीधी जिले के सिहावल क्षेत्र में रीवा लोकायुक्त पुलिस (Rewa Lokayukta Police) की टीम ने एक बड़ी और सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया है। अनुसूचित जाति जूनियर बालक छात्रावास सिहावल क्रमांक 2 के अधीक्षक अशोक पांडे को ₹10,000 की रिश्वत (Bribe) मांगते हुए छात्रावास परिसर में ही ट्रेप कर लिया गया। यह कार्रवाई गुरुवार, 6 नवंबर 2025 को दोपहर करीब 1 बजे की गई।
क्या है पूरा मामला?
लोकायुक्त निरीक्षक उपेंद्र द्विवेदी ने मीडिया को इस हाई-प्रोफाइल मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता वशिष्ठ मुनि द्विवेदी (निवासी ग्राम टिकरी, थाना मड़वास) ने लोकायुक्त टीम के सामने शिकायत दर्ज कराई थी। श्री द्विवेदी, जो एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, उन्हें अपनी GPF (जनरल प्रोविडेंट फंड) की राशि निकालनी थी। इस फाइल को पास करने के एवज में छात्रावास अधीक्षक अशोक पांडे द्वारा उनसे ₹10,000 रिश्वत की मांग की गई थी।
शिकायत की पुष्टि होने के बाद, रीवा लोकायुक्त की 12 सदस्यीय टीम ने ट्रैप की योजना बनाई।
पत्रकारों के सामने पैसा लेने से बचा, लेकिन 'दांव' उल्टा पड़ा
लोकायुक्त टीम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गुरुवार को दोपहर लगभग 1 बजे जब शिकायतकर्ता श्री द्विवेदी, तयशुदा रिश्वत की राशि लेकर अधीक्षक अशोक पांडे के पास पहुंचे, तो उस समय एक अप्रत्याशित स्थिति बन गई।
मौके पर पहले से कुछ पत्रकार मौजूद थे और वे अधीक्षक अशोक पांडे का बयान दर्ज कर रहे थे। पत्रकारों की उपस्थिति को देखते हुए, अधीक्षक ने कथित तौर पर उनके सामने पैसा लेने से इनकार कर दिया।
हालांकि, लोकायुक्त की टीम पहले से ही घात लगाए बैठी थी। जैसे ही टीम ने मौके पर दबिश दी, रिश्वत का लेन-देन होने की पुष्टि हो गई और अधीक्षक अशोक पांडे को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। लोकायुक्त टीम के निरीक्षक उपेंद्र द्विवेदी ने इस पूरे घटनाक्रम की मौखिक जानकारी दी है और बताया है कि फिलहाल आगे की कानूनी कार्यवाही सिहावल रेस्ट हाउस में जारी है।
चौंकाने वाला पहलू: जो था फरियादी, अब बना आरोपी!
इस मामले का एक सबसे चौंकाने वाला और दिलचस्प पहलू यह है कि आरोपी छात्रावास अधीक्षक अशोक पांडे खुद दो साल पहले (2023 में) एक अन्य रिश्वत मामले में फरियादी थे। सूत्रों के अनुसार, अशोक पांडे ने ही आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त राजेश सिंह परिहार को ₹40,000 की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त से ट्रैप करवाया था।
जिस व्यक्ति ने खुद भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाई थी, आज वह खुद ही रिश्वत के दलदल में फंस गया है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे भ्रष्टाचार का चक्र हमारे प्रशासनिक तंत्र में गहराई तक फैला हुआ है।
रीवा लोकायुक्त की यह त्वरित और गोपनीय कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश देती है। जांच पूरी होने के बाद अधीक्षक पर कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।