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सरकारी सिस्टम का क्रूर मजाक: पहले पट्टा दिया, फिर PM आवास बनवाया... अब आशियाने पर चलेगा बुलडोजर!

2026-03-17  BHOPAL REPORTER VIJAY SHARMA  60 views

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नरसिंहपुर। "साहब, पाई-पाई जोड़कर उम्र भर की कमाई इस मकान में लगा दी। सरकार ने ही पट्टा दिया, सरकार ने ही प्रधानमंत्री आवास के पैसे दिए और अब सरकार ही इसे अतिक्रमण बताकर तोड़ने आ रही है। हम गरीब जाएं तो जाएं कहां?"


यह रुआंसे शब्द उन 214 परिवारों के हैं, जिनके सिर पर अब बेघर होने की तलवार लटक रही है। नरसिंहपुर के मुशरान वार्ड, शाकल रोड के किनारे रहने वाले सैकड़ों परिवारों को PWD और राजस्व विभाग ने अतिक्रमण हटाने का नोटिस थमाया है। इस नोटिस ने लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है।


पट्टा और PM आवास: जब रक्षक ही बना भक्षक?
मामले में सबसे बड़ा पेच और सरकारी तंत्र की लापरवाही यह है कि इन लोगों को वर्षों पहले शासन द्वारा बाकायदा पट्टा आवंटित किया गया था। इतना ही नहीं, इन्हीं पट्टों के आधार पर प्रशासन ने इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का पात्र माना और मकान बनाने के लिए सरकारी राशि भी जारी की। आज जब पक्के मकान बनकर तैयार हैं और लोग उनमें रह रहे हैं, तब अचानक विभाग को याद आया कि यह तो 'अतिक्रमण' है।


अपनी जेब से भी लगाए पैसे, अब टूटने की कगार पर मेहनत
पीड़ितों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना से मिली राशि के अलावा, उन्होंने अपनी जमा-पूंजी, गहने गिरवी रखकर और कर्ज लेकर इन मकानों को पूरा किया था। मुशरान वार्ड के निवासियों के अनुसार, "अगर यह जमीन अतिक्रमण में थी, तो हमें पट्टा क्यों दिया गया? जब मकान बन रहा था, तब अधिकारी कहां सो रहे थे? अब जब हमारा सब कुछ दांव पर लगा है, तो बुलडोजर लाने की बात की जा रही है।"


PWD ऑफिस के चक्कर काट रहे लोग, पर सुनवाई शून्य
नोटिस मिलने के बाद से ही क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल है। डरे-सहमे लोग गुहार लगाने के लिए PWD (लोक निर्माण विभाग) के दफ्तर पहुंचे, लेकिन वहां से उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। विभाग का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण या अन्य तकनीकी कारणों से यह जगह अतिक्रमण की श्रेणी में आती है। लेकिन सवाल वही खड़ा है—दोषी कौन? वह गरीब जिसने सरकार पर भरोसा किया, या वह सिस्टम जिसने आंख मूंदकर कागजी कार्यवाही पूरी की?


गंभीर सवाल: सिस्टम की नाकामी की सजा गरीब को क्यों?
यह मामला नरसिंहपुर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है:
अगर जमीन PWD की थी, तो राजस्व विभाग ने पट्टा कैसे जारी कर दिया?
क्या PM आवास योजना का लाभ देने से पहले स्थलीय जांच नहीं की गई थी?
एक तरफ सरकार 'हर सिर को छत' देने का वादा करती है, दूसरी तरफ बने-बनाए घर तोड़ने का नोटिस देती है, यह कैसा न्याय है?


आगे क्या?
फिलहाल 214 परिवार इस कड़ाके की ठंड और अनिश्चितता के बीच अपने आशियाने को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन तक, सबकी चुप्पी इन गरीबों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है। अब देखना यह होगा कि क्या नरसिंहपुर प्रशासन अपनी गलती सुधारते हुए इन गरीबों को राहत देता है या फिर 'सिस्टम' की बलि एक बार फिर गरीब का आशियाना चढ़ेगा।


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