
नबीनगर, औरंगाबाद, बिहार: रिश्तों के ताने-बाने में अक्सर प्यार और विश्वास की डोर बंधी होती है, लेकिन कभी-कभी ये डोर इतनी कमजोर हो जाती है कि नफरत और धोखे की काली छाया इसमें लिपट जाती है। बिहार के औरंगाबाद जिले से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। एक नवविवाहिता ने, शादी के सिर्फ 45 दिनों के भीतर, अपने ही फूफा के साथ मिलकर अपने पति की बेरहमी से हत्या करवा दी। यह कहानी प्रेम, धोखे और खूनी साजिश का ऐसा गठजोड़ है, जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए पत्नी, उसके फूफा और हत्या में शामिल शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है।
उस काली रात की खूनी दास्तान: कैसे बिछाया गया मौत का जाल?
यह घटना 24 जून की रात की है, जो प्रियांशु नाम के एक युवा के लिए जिंदगी की आखिरी रात साबित हुई। प्रियांशु अपने रिश्तेदार के घर वाराणसी के चंदौली से ट्रेन से लौट रहे थे। उन्हें लेने के लिए गांव के दो लड़के बाइक से नवीनगर रोड रेलवे स्टेशन गए थे। यहां तक सब सामान्य लग रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे एक खूनी खेल की पटकथा लिखी जा चुकी थी।
प्रियांशु लगातार अपनी पत्नी गुंजा को फोन पर अपनी लोकेशन बता रहे थे। उन्हें क्या पता था कि जिस पत्नी को वो अपनी सुरक्षित वापसी की खबर दे रहे हैं, वही उनके मौत के सौदागरों को पल-पल की जानकारी दे रही है। गुंजा, जिसे प्रियांशु के घर आने का इंतजार होना चाहिए था, वो अपने फूफा जीवन सिंह के साथ मिलकर प्रियांशु को रास्ते से हटाने की साजिश को अंजाम दे रही थी।
जैसे ही प्रियांशु और उनके साथ आए गांव के दोनों लड़के नवीनगर थाना क्षेत्र के लेंबोखाप गांव के पास पहुंचे, घात लगाए बैठे भाड़े के शूटरों ने उनकी बाइक को रोक लिया। इससे पहले कि प्रियांशु कुछ समझ पाते, शूटरों ने उन पर ताबड़तोड़ चार गोलियां दाग दीं। गोलियों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा। हत्यारों ने तुरंत गुंजा को फोन कर "काम हो गया है" बताया। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। गोलियां लगने के बावजूद प्रियांशु की सांसें चल रही थीं।
गुंजा और उसका फूफा यह सुनकर घबरा गए। उन्होंने फिर से शूटरों से संपर्क किया और सुनिश्चित करने को कहा कि काम पूरा हो। इस बीच, प्रियांशु की बाइक पर सवार गांव के दोनों लड़के, जो इस अचानक हमले से सहम गए थे, हिम्मत कर प्रियांशु को गंभीर हालत में अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने प्रियांशु को बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन घाव इतने गहरे थे कि इलाज के दौरान प्रियांशु ने दम तोड़ दिया। एक हँसते-खेलते घर में मातम पसर गया।
15 साल का 'अवैध' प्रेम-प्रसंग और शादी के बाद 'पति का कांटा'
पुलिस अधीक्षक अम्बरीश राहुल ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए जो सच्चाई बताई, वो हैरान करने वाली थी। प्रियांशु और गुंजा की शादी को अभी मुश्किल से 45 दिन ही हुए थे, लेकिन इस शादी से पहले की एक कड़वी सच्चाई थी, जो इस हत्याकांड की नींव बनी। गुंजा का विवाह प्रियांशु से होने के 15 साल पहले से ही अपने फूफा जीवन सिंह के साथ प्रेम संबंध था। यह एक 'अवैध' संबंध था, जिसे गुंजा और जीवन सिंह समाज और परिवार से छिपाकर रखे हुए थे।
गुंजा को यह शादी किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं थी। वह प्रियांशु के साथ अपनी जिंदगी बिताने को तैयार नहीं थी, क्योंकि उसके दिल में तो उसका फूफा जीवन सिंह बसा हुआ था। प्रियांशु उसके रास्ते का 'कांटा' बन गए थे। अपने पति को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने के लिए उसने अपने फूफा जीवन सिंह के साथ मिलकर एक खतरनाक और खूनी साजिश रची। यह एक ऐसी साजिश थी, जिसमें अपनों ने ही अपनों के खून के प्यासे बन गए।
जब प्रियांशु वाराणसी से वापस लौट रहे थे, तो गुंजा ने इस मौके को भुनाने का फैसला किया। उसने तुरंत अपने फूफा जीवन सिंह को प्रियांशु की पल-पल की खबर दी। इसके बाद जीवन सिंह ने अपने 'प्यार' के लिए भाड़े के शूटरों से संपर्क साधा और पैसों के लालच में उन शूटरों ने प्रियांशु की निर्मम हत्या कर दी।
न्याय की दहलीज पर अपराधी: पुलिस की त्वरित कार्रवाई
इस जघन्य हत्याकांड के बाद पुलिस तुरंत हरकत में आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपनी जांच तेज कर दी। शक की सुई धीरे-धीरे गुंजा और उसके फूफा जीवन सिंह की तरफ घूमने लगी। पुलिस की कड़ी पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस पूरी खूनी साजिश का पर्दाफाश हो गया।
पुलिस अधीक्षक अम्बरीश राहुल ने बताया कि मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद बुधवार शाम को गुंजा, जीवन सिंह और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। न्याय की दहलीज पर अब उन्हें अपने किए की सजा भुगतनी पड़ेगी।
यह घटना एक बार फिर समाज में रिश्तों के बदलते मायने और नैतिक मूल्यों के पतन को दर्शाती है। कैसे प्रेम का पवित्र रिश्ता घृणा और धोखे में बदल सकता है, और कैसे अपनों के बीच ही खूनी साजिशें रची जा सकती हैं। यह मामला हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर ऐसे अपराधों की जड़ें कहां हैं और इन्हें रोकने के लिए हमें क्या करने की जरूरत है। यह कहानी सिर्फ एक अपराध की नहीं, बल्कि रिश्तों के विश्वासघाती मोड़ की है, जो हमेशा के लिए समाज के माथे पर एक काला धब्बा बन गई है।