
ग्यारसपुर , मध्य प्रदेश: बिजली कंपनी के स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध अब लोगों को महंगा पड़ने लगा है। विदिशा जिले के मनौरा गांव में 5 सितंबर को हुए एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, ग्रामीणों ने न केवल नए स्मार्ट मीटर उखाड़ फेंके बल्कि उन्हें गांव के बीचो-बीच होली चौक पर जमा कर दिया। इस घटना के बाद, बिजली विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
क्या हुआ था 5 सितंबर को?
मनौरा गांव में बिजली विभाग की टीम स्मार्ट मीटर लगा रही थी, लेकिन ग्रामीणों ने इसका जमकर विरोध किया। विरोध इतना बढ़ गया कि कुछ लोगों ने घरों से जबरन ये मीटर उखाड़ दिए और उन्हें गांव के चौराहे पर इकट्ठा कर दिया। इस घटना से इलाके में तनाव फैल गया था। बिजली कंपनी के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर इन उखड़े हुए मीटरों को इकट्ठा किया और गिनती के बाद उन्हें वापस कार्यालय ले गए।
घटना के तुरंत बाद, बिजली विभाग ने सोशल मीडिया और लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों से अपील की कि वे अपने घरों में स्मार्ट मीटर लगवाएं। इसके साथ ही, विभाग ने यह भी साफ कर दिया कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों और बिजली की चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
11 लोगों पर क्यों दर्ज हुआ केस?
बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) धर्मेंद्र राजपूत ने इस पूरे मामले की गहन जांच की। जांच के बाद, उन्होंने 16 सितंबर को थाने में एक विस्तृत आवेदन दिया। इस आवेदन में उन्होंने मीटर उखाड़ने वाले, ग्रामीणों को उकसाने वाले और शांति भंग करने की कोशिश करने वाले लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की थी।
जेई की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने 11 लोगों के खिलाफ IPC की धारा 188, 353, 427, 34 और सार्वजनिक संपत्ति निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इन लोगों पर घरों में घुसकर मीटरों से छेड़छाड़ करने, लाइन काटने और तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया है।
कौन हैं वे 11 लोग जिन पर दर्ज हुआ है केस?
जिन 11 लोगों पर केस दर्ज हुआ है, उनके नाम हैं:
* शिवराज सिंह रघुवंशी
* राजेन्द्र रघुवंशी
* अभिनेश शर्मा
* भूपेन्द्र रघुवंशी
* राकेश कुशवाह
* नीलू रघुवंशी
* हर्ष रघुवंशी
* तब्बतसिंह
* अजय विश्वकर्मा
* निखिल रघुवंशी
* रविशंकर शर्मा
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी को डराने के लिए नहीं, बल्कि कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए की गई है। इस घटना से यह साफ हो गया है कि सरकारी योजनाओं में बाधा डालने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।
स्मार्ट मीटर बिजली चोरी रोकने और बिलिंग को पारदर्शी बनाने के लिए लगाए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इनके खिलाफ लगातार विरोध देखने को मिल रहा है। यह मामला एक मिसाल बन सकता है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने में मदद कर सकता है।