
सांची। कहते हैं कि संवाद में वो शक्ति है जो तलवार की धार को भी कुंद कर सकती है। सांची में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहाँ पुलिस ने केवल डंडा नहीं चलाया, बल्कि 'शांति की चौपाल' सजाकर दो गुटों के बीच बरसों से पनप रही नफरत को खत्म कर दिया। सांची पुलिस का यह मानवीय चेहरा अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
खूनी रंजिश की परछाईं और सुलगता गांव
विवाद की जड़ें ग्राम गुलगांव के ज्ञानपुरा में हुए एक पुराने हत्याकांड से जुड़ी हैं। हालांकि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया था, लेकिन जेल से छूटने के बाद जब आरोपी पक्ष गांव लौटा, तो सामाजिक ताना-बाना बिखर गया। गांव के लोगों में आरोपियों की वापसी को लेकर गहरा आक्रोश था।
नतीजतन, आए दिन तनातनी, गाली-गलौज और छोटे-मोटे विवाद होने लगे। आलम यह था कि दोनों पक्ष अक्सर लामबंद होकर थाने की दहलीज तक पहुँच जाते थे। गांव की हवाओं में घुला यह तनाव किसी बड़ी अनहोनी का संकेत दे रहा था।
जब चौपाल पर बैठी 'खाकी' और 'पंचायत'
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी जयप्रकाश त्रिपाठी ने एक अनूठी पहल की। शुक्रवार को वे भारी पुलिस बल के साथ सीधे गांव की चौपाल पर जा पहुंचे। उनके साथ नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
करीब 150 ग्रामीणों के बीच सजी इस चौपाल का मकसद डराना नहीं, बल्कि समझाना था। जयप्रकाश त्रिपाठी ने ग्रामीणों को स्पष्ट संदेश दिया कि वैमनस्य और हिंसा से कभी किसी का भला नहीं होता। उन्होंने कानून का पाठ पढ़ाने के साथ-साथ आपसी भाईचारे की अहमियत पर जोर दिया।
संवाद से खुला समाधान का रास्ता
घंटों चली इस चर्चा में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी शिकायतें रखीं। पुलिस और जनप्रतिनिधियों ने बीच का रास्ता निकालते हुए दोनों गुटों को इस बात पर राजी किया कि वे पुरानी बातों को भूलकर भविष्य में शांति बनाए रखेंगे।
थाना प्रभारी जयप्रकाश त्रिपाठी ने दो टूक शब्दों में कहा:
> "पुलिस का काम केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि समाज में टूटे हुए रिश्तों को जोड़ना भी है। अगर गांव के लोग आपसी सहमति से विवाद सुलझाते हैं, तो यह समाज और कानून दोनों की सबसे बड़ी जीत है।"
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नगर में पुलिस की कार्यशैली की सराहना
सांची पुलिस की इस 'सॉफ्ट पावर' की अब हर तरफ तारीफ हो रही है। जिला पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में जिस तरह थाना प्रभारी हर शाम नगर भ्रमण कर सुरक्षा का अहसास दिलाते हैं, उससे आम जनता का पुलिस पर भरोसा बढ़ा है। गुलगांव की इस चौपाल ने साबित कर दिया कि यदि प्रशासन संवेदनशील हो, तो हिंसा की राह पर चलते कदमों को भी रोका जा सकता है।
अब गांव में फिर से शांति की बयार बहने लगी है और सांची पुलिस की यह 'शांति चौपाल' प्रदेश के अन्य थानों के लिए एक नजीर बन गई है।