
वसीम कुरेशी सांची, मध्यप्रदेश। इन दिनों पूरे देश में नवरात्रि महापर्व की धार्मिक गूंज सुनाई दे रही है, और इस पावन उत्सव से सांची नगरी भी पूरी तरह से आलोकित है। माता रानी की भक्ति और श्रद्धा के इस नौ दिवसीय पर्व में, नगर परिषद अध्यक्ष एवं समाजसेवी पप्पू रेवाराम ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने नगर की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को एक नई ऊर्जा दी है। उन्होंने नगर के वार्ड क्रमांक एक की सक्रिय महिला भजन मंडली को उनके भजन-संगीत के सफर को और सुगम व सशक्त बनाने के लिए ढोलक, जांझ और मंजीरे जैसे महत्वपूर्ण वाद्ययंत्र भेंट किए हैं।
समाज सेवा का अनूठा रंग: भक्ति को मिला वाद्ययंत्रों का साथ
नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम की यह पहल केवल एक उपहार नहीं है, बल्कि यह स्थानीय कला और संस्कृति को प्रोत्साहन देने का एक स्पष्ट उदाहरण है। नवरात्रि के दौरान भजन-कीर्तन का विशेष महत्व होता है। महिलाएं अपनी मधुर आवाज और भक्तिपूर्ण गीतों से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती हैं, लेकिन अच्छे वाद्ययंत्रों की कमी कई बार उनकी प्रस्तुति में बाधा डालती है।
इसी जरूरत को समझते हुए, पप्पू रेवाराम ने व्यक्तिगत रूप से महिला भजन मंडली को ये वाद्ययंत्र भेंट किए। इस मौके पर महिला मोर्चा की मंडल अध्यक्ष श्रीमती सुशीला अहिरवार भी उपस्थित रहीं। महिलाओं ने इन वाद्ययंत्रों को पाकर अपार हर्ष व्यक्त किया और कहा कि अब वे और भी जोश और ताल के साथ माता रानी की आराधना कर पाएंगी। यह भेंट न केवल उनकी भक्ति को बल देगी, बल्कि आगामी वर्षों में भी भजन-कीर्तन की इस परंपरा को जीवंत रखने में सहायक सिद्ध होगी।
नगर में नवरात्रि की भव्यता: भक्ति का अद्वितीय संगम
सांची नगर में नवरात्रि की धूम इस समय चरम पर है। हर गली, हर चौराहा भक्ति के रंग में सराबोर नज़र आ रहा है। नगर के सभी वार्डों में माता रानी की मनोहारी झांकियां सजाई गई हैं, जो अपनी अलौकिक सुंदरता से भक्तों को अपनी ओर खींच रही हैं। कारीगरों ने इन झांकियों को अद्भुत और दिव्य रूप दिया है, जिससे सांची का हर कोना अध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया है।
प्रतिदिन संध्या बेला में, इन झांकियों पर भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। यहां गूंजती भव्य महाआरती और जोरदार भजन-कीर्तन की ध्वनि से पूरा माहौल दिव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो रहा है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग—सभी अपनी-अपनी श्रद्धा अनुसार माता रानी के दर्शन और पूजन में लीन हैं।
भजन मंडलियों का महत्व: सांस्कृतिक विरासत की रक्षक
भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में भजन मंडलियों का एक अद्वितीय स्थान है। ये मंडलियां सिर्फ गीत नहीं गातीं, बल्कि वे हमारी सांस्कृतिक विरासत की सशक्त रक्षक होती हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में, महिलाएं इन मंडलियों के माध्यम से न केवल भक्ति का प्रचार करती हैं, बल्कि सामाजिक एकता और सौहार्द का भी संदेश देती हैं।
पप्पू रेवाराम द्वारा ढोलक, जांझ और मंजीरे भेंट करने का यह निर्णय दर्शाता है कि वह स्थानीय कला और महिला सशक्तिकरण के प्रति कितने गंभीर हैं। ढोलक ताल की धुरी है, जांझ और मंजीरे संगीत को लय और मधुरता प्रदान करते हैं। इन वाद्ययंत्रों के सहयोग से महिला मंडली के सदस्य अपनी प्रतिभा को और निखार सकेंगी।
पप्पू रेवाराम की पहल से मिला सामुदायिक सद्भाव को बल
पप्पू रेवाराम की यह पहल सामुदायिक सद्भाव और धार्मिक उत्साह को बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगी। अक्सर छोटे कस्बों में इस तरह की सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। जब जनप्रतिनिधि और समाजसेवी इस तरह से सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो स्थानीय संस्कृति को एक नई पहचान और जीवन मिलता है। सांची में इस वर्ष की नवरात्रि, पप्पू रेवाराम के इस जनहितकारी कार्य के कारण एक अविस्मरणीय पर्व बन गई है। यह उनके जनसंपर्क और समाज के प्रति समर्पण को भी दर्शाता है। यह भेंट पूरे नगर में एक सकारात्मक चर्चा का विषय बन गई है, जिससे यह उम्मीद लगाई जा रही है कि आने वाले समय में अन्य वार्डों की भजन मंडलियों को भी इस तरह का प्रोत्साहन मिलेगा।
सांची के नागरिक इस सहयोग से उत्साहित हैं और माता रानी से कामना करते हैं कि यह भक्ति और सांस्कृतिक ऊर्जा पूरे वर्ष नगर में बनी रहे। यह खबर सांची नगर की सामाजिक चेतना और धार्मिक आस्था का एक उज्जवल उदाहरण प्रस्तुत करती है