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सांची में मतदाता सूची पर संग्राम: क्या एक समुदाय को निशाना बनाने की हो रही है साजिश?

2026-01-23  Raisen Waseem kureshi  290 views

ImgResizer_IMG-20260123-WA0017सांची। लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव 'चुनाव' से पहले सांची विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया, जिसका उद्देश्य सूची को पारदर्शी बनाना है, अब विवादों के घेरे में है। कांग्रेस ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया की आड़ में एक विशेष समुदाय, खासकर अल्पसंख्यक मतदाताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।

फर्जी आपत्तियों का जाल और मतदाताओं की परेशानी

कांग्रेस का दावा है कि सांची विधानसभा क्षेत्र में हजारों मतदाताओं के खिलाफ संदिग्ध और फर्जी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये आपत्तियां उन लोगों के नाम से दर्ज हैं, जिन्हें खुद पता ही नहीं है कि उन्होंने किसी के नाम पर आपत्ति जताई है। दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले निर्दोष मतदाता अब अपने हक को बचाने के लिए बीएलओ और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

"लोकतंत्र की आत्मा पर चोट": कांग्रेस का तीखा हमला

इस पूरे मामले को लेकर ब्लॉक कांग्रेस सांची ने मोर्चा खोल दिया है। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन नायब तहसीलदार ललित सक्सेना को सौंपा गया। कांग्रेस नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यह केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश है ताकि एक विशेष वोट बैंक को सूची से बाहर का रास्ता दिखाया जा सके।

ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अंकित मेहतो ने कड़े शब्दों में कहा, “एक विशेष समुदाय के नामों पर जिस तरह संदेहास्पद आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं, वह लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा प्रहार है। यदि प्रशासन ने निष्पक्ष जांच नहीं की, तो यह साफ हो जाएगा कि सत्ता के संरक्षण में मतदाताओं को बाहर करने का खेल खेला जा रहा है।”

बांसखेड़ा में खुला 'फर्जीवाड़े' का खेल

धोखाधड़ी का एक बड़ा उदाहरण जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम बांसखेड़ा में सामने आया है। जनपद पंचायत सदस्य प्रतिनिधि रामबाबू सराठे ने खुलासा किया कि वहां लगभग 12 दर्जन (144) मतदाताओं के नामों पर एक ही समुदाय को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गईं।

जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कथित आपत्तिकर्ता से संपर्क किया, तो उसने सिरे से इनकार कर दिया। उस व्यक्ति का कहना है कि उसने किसी के खिलाफ कोई आपत्ति दर्ज नहीं की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि किसी अज्ञात गिरोह द्वारा फर्जी दस्तावेजों या डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर यह भ्रम फैलाया जा रहा है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और आंदोलन की चेतावनी

मामले की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार ललित सक्सेना ने आश्वासन दिया है कि ज्ञापन को जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि फर्जी आपत्तिकर्ताओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।

इस मामले की गूँज अब केवल सांची तक सीमित नहीं है। ज्ञापन की प्रतियां मध्यप्रदेश निर्वाचन आयोग और भारत निर्वाचन आयोग को भी भेजी गई हैं।

निष्पक्षता की अग्निपरीक्षा

चुनाव की शुचिता मतदाता सूची की शुद्धता पर निर्भर करती है। यदि मतदाता सूची में राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह के बदलाव किए जा रहे हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन 'अदृश्य' आपत्तिकर्ताओं का पर्दाफाश करता है या यह विवाद चुनाव तक और गहराता जाएगा।


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