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सांची: करोड़ों के प्रोजेक्ट, पर 'रखरखाव' में बजट जीरो? खंडहर बन रहे पर्यटन निगम के आलीशान भवन!

2025-12-19  Raisen Waseem kureshi  351 views

ImgResizer_20251219_0835_32820सांची। विश्व धरोहर (World Heritage Site) का गौरव रखने वाली भगवान बुद्ध की नगरी सांची में विकास के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये तो बहा दिए गए, लेकिन आज जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) ने बीते वर्षों में यहाँ कई भव्य प्रोजेक्ट्स खड़े किए, मगर उचित निगरानी और रखरखाव के अभाव में ये अब बदहाली का शिकार हो रहे हैं। आलम यह है कि उद्घाटन के समय जो पत्थर चमक रहे थे, वे अब टूटकर बिखर रहे हैं।

शानदार उद्घाटन, फिर छाई वीरानी

पर्यटन निगम ने रेलवे स्टेशन से लेकर स्तूप पहाड़ी के मुख्य द्वार तक सड़क के दोनों ओर सौंदर्यीकरण के लिए लाखों की लागत से पत्थर की रेलिंग लगवाई थी। आज यह रेलिंग कई जगहों से क्षतिग्रस्त होकर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। इतना ही नहीं, होटल गेटवे रिट्रीट के ठीक पीछे करोड़ों की लागत से बना 'शीश महल' भी सरकारी उपेक्षा की भेंट चढ़ गया है।

कभी यहाँ सांची बौद्ध यूनिवर्सिटी का संचालन होता था, जिससे विभाग को किराया भी मिलता था। लेकिन करीब एक साल पहले यूनिवर्सिटी के अपने परिसर में शिफ्ट होते ही यह विशाल भवन अब वीरान और सुनसान पड़ा है।

25 करोड़ का थीम पार्क भी पड़ा है ‘ठंडा’

सांची के पुराने सर्किट हाउस प्रांगण की करीब 14 एकड़ भूमि पर लगभग 25 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से 'बौद्ध थीम पार्क' का निर्माण किया गया था। उम्मीद थी कि यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा, लेकिन वर्तमान में यहाँ बनी स्वल्पाहार कैंटीन बंद पड़ी है। इसी तरह पर्यटन निगम का 'कैफेटेरिया जोगी' भी खाली होने के बाद अब जर्जर होने लगा है। करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति का इस तरह बर्बाद होना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्या निजी हाथों में जाने से सुधरेंगे हालात?

स्थानीय नागरिकों और सूत्रों की मानें तो इन संपत्तियों को बचाने के लिए अब विभाग इन्हें 'प्राइवेट कोटे' यानी निजी हाथों में लीज पर देने की योजना बना रहा है। चर्चा है कि बौद्ध थीम पार्क, शीश महल और कैफेटेरिया को किराए पर दिया जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो न केवल इन भवनों का संरक्षण हो पाएगा, बल्कि निगम को फिर से राजस्व मिलना शुरू हो जाएगा।

पर्यटकों की सुविधा या सिर्फ कागजी विकास?

सांची में हर साल हजारों की संख्या में देशी-विदेशी सैलानी आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन सुविधाओं को सहेजकर रखा जाए, तो सांची की वैश्विक छवि और बेहतर होगी। फिलहाल, करोड़ों खर्च होने के बावजूद पर्यटकों को वह अनुभव नहीं मिल पा रहा है, जिसका वादा किया गया था।

> इनका कहना है:

> "पर्यटन विकास निगम से मिली जानकारी के मुताबिक, बौद्ध थीम पार्क, शीश महल और कैफेटेरिया को जल्द ही प्राइवेट कोटे में देने की तैयारी चल रही है। उम्मीद है कि निजी प्रबंधन आने से इन प्रोजेक्ट्स की स्थिति में सुधार होगा।" > — अशोक अरोरा, मैनेजर, होटल गेटवे रिट्रीट, सांची


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