
सांची। खुशियों का त्योहार मकर संक्रांति केवल तिल-गुड़ और पतंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपनों के बीच स्नेह बांटने का भी पर्व है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए सांची नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम ने एक अनूठी पहल की। उन्होंने मकर संक्रांति की रात उन बेटियों के नाम कर दी, जो शिक्षा की खातिर अपने घरों से दूर छात्रावास में रह रही हैं।
रात 9 बजे अचानक पहुंचे छात्रावास, बेटियों को दिया सरप्राइज
मकर संक्रांति की पावन बेला पर जब पूरा शहर उत्सव में डूबा था, तब रात्रि लगभग 9 बजे नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम स्थानीय कन्या छात्रावास पहुंचे। उनके साथ भाजपा नेता संजय साहनी भी मौजूद थे। छात्रावास की छात्राओं के लिए यह एक सुखद आश्चर्य था। अध्यक्ष ने न केवल छात्राओं से मुलाकात की, बल्कि उन्हें अपने हाथों से मिठाई और तिल के लड्डू खिलाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं।
"घर की कमी महसूस नहीं हुई": छात्राओं के छलके जज्बात
छात्रावास में रहने वाली अधिकतर बेटियां दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आती हैं। त्योहार के समय अपने परिवार से दूर रहना उनके लिए थोड़ा भावुक पल होता है। छात्राओं ने बताया कि दूरी और पढ़ाई की व्यस्तता के कारण वे इस बार घर नहीं जा सकी थीं। लेकिन जब शहर के जनप्रतिनिधि खुद उनके बीच मिठाई लेकर पहुंचे, तो उन्हें लगा जैसे परिवार का कोई बड़ा सदस्य उनके पास आ गया हो।
छात्राओं ने चर्चा के दौरान कहा, "हमें यहाँ घर जैसा माहौल मिलता है और अध्यक्ष जी के आने से हमारा उत्साह दोगुना हो गया है।"
सुविधाओं का लिया जायजा, व्यवस्थाओं पर जताई संतुष्टि
औपचारिक शुभकामनाओं के साथ-साथ अध्यक्ष पप्पू रेवाराम ने एक जिम्मेदार अभिभावक की तरह छात्रावास की व्यवस्थाओं को भी परखा। उन्होंने छात्राओं से सीधा संवाद करते हुए पूछा कि उन्हें रहने, खाने या पढ़ाई में कोई समस्या तो नहीं आ रही है?
छात्राओं ने छात्रावास की वर्तमान व्यवस्थाओं पर पूर्ण संतोष व्यक्त किया। इस दौरान अध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि नगर परिषद बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर है और छात्रावास की सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
सादगी और आत्मीयता ने जीता सबका दिल
इस पूरे कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता संजय साहनी ने भी छात्राओं का मनोबल बढ़ाया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। सांची की राजनीति में अक्सर रैलियां और सभाएं तो देखी जाती हैं, लेकिन इस तरह की आत्मीय पहल ने स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया पर भी इस संवेदनशीलता की काफी सराहना हो रही है।
मकर संक्रांति का यह पर्व इन छात्राओं के लिए केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि यादों का एक खूबसूरत हिस्सा बन गया।