VIDISHA BHARTI

collapse
...
Home / Politics/राजनीति / RTI की उड़ी धज्जियां, भ्रष्टाचार के डर से पूर्व प्राचार्य ने जानकारी देने से किया इनकार: शिक्षा विभाग में 'लेटर-गेम' जारी!

RTI की उड़ी धज्जियां, भ्रष्टाचार के डर से पूर्व प्राचार्य ने जानकारी देने से किया इनकार: शिक्षा विभाग में 'लेटर-गेम' जारी!

2025-06-22  Editor Shubham Jain  876 views

IMG-20250622-WA0095(1)
विदिशा, मध्य प्रदेश: सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम 2005, जिसे आम जनता को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने और जवाबदेही तय करने का अधिकार देता है, विदिशा के शिक्षा विभाग में इसकी सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ताजा मामला ग्राम कस्बताल के शासकीय हाई स्कूल से सामने आया है, जहां पूर्व प्रभारी प्राचार्य जगदीश साहू पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर मांगी गई जानकारी देने से इनकार करने का गंभीर आरोप लगा है। यह घटना शिक्षा विभाग में व्याप्त मनमानी और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है, जहां महीनों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है, और "लेटर का खेल" बदस्तूर जारी है।

RTI को किया दरकिनार, भ्रष्टाचार की आशंका तेज

वर्तमान समय में शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया है कि इसकी सच्चाई जानने के लिए नागरिक लगातार प्रयासरत हैं। इसी कड़ी में, ग्राम कस्बताल के शासकीय हाई स्कूल से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई थी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि शासन द्वारा स्कूलों को प्रदान की जाने वाली राशि का उपयोग कहाँ और किस कार्य में किया जा रहा है। एक आवेदन पत्र के माध्यम से 25 अप्रैल 2025 को यह जानकारी मांगी गई थी।

लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि पूर्व प्रभारी प्राचार्य जगदीश साहू ने उक्त जानकारी को देने से साफ इनकार कर दिया। उनके इस रवैये से यह साफ प्रतीत होता है कि शासन द्वारा स्कूलों को प्रदान की गई राशि का दुरुपयोग किया गया है। पूर्व प्रभारी प्राचार्य के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 जैसे महत्वपूर्ण कानून तक की अवहेलना कर दी। यह सीधे तौर पर दर्शाता है कि उन्हें किसी का डर नहीं है और वे अपनी मनमानी करने को स्वतंत्र महसूस करते हैं।

आवेदक ने खटखटाया जिला शिक्षा अधिकारी का दरवाजा, राज्य सूचना आयोग जाने की तैयारी

पूर्व प्रभारी प्राचार्य द्वारा जानकारी देने से इनकार किए जाने के बाद, आवेदक ने हार नहीं मानी। उन्होंने तत्काल प्रथम अपील जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित रूप से की है। यह कदम दर्शाता है कि आवेदक मामले को लेकर गंभीर हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहते हैं।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला शिक्षा अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। क्या पूर्व प्रभारी प्राचार्य जगदीश साहू जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराएंगे, या वे उनके आदेश की भी पूर्व की तरह अवहेलना करते रहेंगे? ग्रामीण जनों का कहना है कि पूर्व प्राचार्य जगदीश साहू को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और वरिष्ठ अधिकारियों से सांठ-गांठ के कारण उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। यह आरोप यदि सत्य है, तो यह शिक्षा विभाग में व्याप्त गहरी जड़ों तक फैले भ्रष्टाचार और मिलीभगत को उजागर करता है।

क्यों नहीं होती ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई?

यह एक बड़ा सवाल है कि आखिर क्यों शासन ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाता है, जो खुलेआम नियमों और कानूनों का उल्लंघन करते हैं? क्या यह अधिकारियों की मिलीभगत है, या सिस्टम की कमजोरी, जिसके चलते ऐसे भ्रष्ट कर्मचारी बच निकलते हैं? जब सूचना के अधिकार जैसे सशक्त कानून को ही दरकिनार कर दिया जाता है, तो जनता का विश्वास सरकारी तंत्र से उठने लगता है।

यदि इस बार भी आवेदक को जानकारी प्राप्त नहीं होती है, तो उन्होंने राज्य सूचना आयोग जाने का मन बना लिया है। यह कदम मामले को और भी गंभीर बना देगा, क्योंकि राज्य सूचना आयोग सीधे तौर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय कर सकता है और उन पर जुर्माना भी लगा सकता है।

जनता में आक्रोश: पारदर्शिता की मांग तेज

कस्बताल के ग्रामीण इस घटना को लेकर खासे आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि स्कूलों के लिए आने वाली राशि का सही उपयोग होना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य और शिक्षा से जुड़ा मामला है। ऐसे में यदि कोई अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है, तो उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यह मामला शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को फिर से रेखांकित करता है।

क्या आपको लगता है कि ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सूचना के अधिकार का सम्मान हो और भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके?जा


Share:

26