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₹10 करोड़ के स्थायी वारंटी ने किया सरेंडर: कुरवाई पुलिस की दबिश लाई रंग!

2025-08-01  Editor Shubham Jain  862 views

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राघवेंद्र दांगी विदिशा, मध्यप्रदेश - विदिशा पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। कुरवाई थाना पुलिस की लगातार दबिश और दबाव के चलते ₹10 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोपी ने आखिरकार मुंबई की कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। यह आरोपी बीते कई महीनों से पुलिस की गिरफ्त से बच रहा था, लेकिन पुलिस की सख्त रणनीति के आगे उसे झुकना पड़ा। न्यायालय ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

जानिए क्या था पूरा मामला?

फरार स्थायी वारंटी फिरोज मोहम्मद खान, जो कुरवाई, विदिशा का निवासी है, के खिलाफ मुंबई की कोर्ट में ₹10 करोड़ की भारी-भरकम राशि से जुड़े धारा 138 एन.आई. एक्ट का मामला चल रहा था। यह एक्ट मुख्य रूप से चेक बाउंस से संबंधित होता है। लंबे समय से फरार चल रहे फिरोज को पकड़ने के लिए मुंबई की अदालत ने उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया था।

पुलिस की खास रणनीति ने दिलाई सफलता

मध्यप्रदेश पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना के निर्देश पर, फरार आरोपियों और वारंटियों की धरपकड़ के लिए पूरे प्रदेश में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत, पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के मार्गदर्शन में कुरवाई पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया।

कुरवाई की एसडीओपी सुश्री रोशनी ठाकुर के नेतृत्व में थाना प्रभारी निरीक्षक आर.के. मिश्र और उनकी टीम ने फिरोज मोहम्मद खान को पकड़ने के लिए एक सुनियोजित रणनीति बनाई। पुलिस की टीमें लगातार विदिशा और भोपाल सहित आरोपी के सभी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं। पुलिस के बढ़ते दबाव और लगातार पीछा करने के कारण आखिरकार आरोपी के पास कोई और विकल्प नहीं बचा।

पुलिस की इस सख्ती के आगे मजबूर होकर, फिरोज मोहम्मद खान ने खुद मुंबई की कोर्ट में जाकर सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उसके आत्मसमर्पण को स्वीकार करते हुए उसे तुरंत जेल भेज दिया।

इन पुलिसकर्मियों की भूमिका रही सराहनीय

इस बड़ी कामयाबी में कुरवाई पुलिस टीम के कुछ खास सदस्यों की भूमिका बेहद सराहनीय रही। थाना प्रभारी निरीक्षक आर.के. मिश्र के अलावा, प्रधान आरक्षक शेरसिंह रघुवंशी, आरक्षक इंद्राज सिंह और आरक्षक महेंद्र लोधी ने दिन-रात मेहनत कर आरोपी पर दबाव बनाए रखा। पुलिस के इसी टीम वर्क ने आखिरकार फरार आरोपी को कानून के शिकंजे में लाने में सफलता दिलाई।

इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस की मुस्तैदी के आगे कोई भी अपराधी ज्यादा दिनों तक नहीं बच सकता।


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