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रायसेन में 'सफेद हाथी' बना सरकारी गेहूं: 35 करोड़ का अनाज सड़ा, बचाने के नाम पर फूंक दिए 150 करोड़!

2026-04-05  Editor Shubham Jain  269 views

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रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता और बड़ी लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। जहां एक ओर देश में करोड़ों लोग दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं रायसेन के सरकारी वेयरहाउस में 22 हजार टन गेहूं सड़कर कचरा हो गया।


हैरानी की बात यह नहीं है कि अनाज सड़ गया, बल्कि हैरानी इस बात पर है कि जिस गेहूं की कीमत महज 35 करोड़ रुपये थी, उसे 'सुरक्षित' रखने के नाम पर सरकार ने रखरखाव, किराया और कीटनाशकों पर करीब 150 करोड़ रुपये बहा दिए।


34 बार छिड़का कीटनाशक, फिर भी हुआ सत्यानाश
रिकॉर्ड्स के मुताबिक, इस अनाज को बचाने के लिए कागजों पर 34 बार कीटनाशक का छिड़काव किया गया। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह गेहूं अब इंसानों तो क्या, पशुओं के खाने लायक भी नहीं बचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सड़ा हुआ अनाज अब एक 'जहर' बन चुका है, जिसका उपयोग स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।


लापरवाही या कोई बड़ा खेल?
इस पूरे मामले की कड़ियां साल 2022 से जुड़ती हैं। उस दौरान सीहोर जिले के बकतरा से इस गेहूं को रायसेन के नूरगंज और दिवटिया वेयरहाउस में शिफ्ट किया गया था। सवाल यह उठता है कि:
 जब वेयरहाउस में भंडारण की स्थिति पहले से ही खराब थी, तो हजारों टन गेहूं वहां क्यों भेजा गया?


 क्या अधिकारियों को मालूम नहीं था कि नमी और अव्यवस्था अनाज को लील जाएगी?


 क्या यह सिर्फ लापरवाही है या इसके पीछे किराया और रखरखाव के नाम पर बजट ठिकाने लगाने का कोई बड़ा खेल?


जनता के टैक्स की 'बलि'
यह सिर्फ अनाज की बर्बादी नहीं है, बल्कि आम जनता के टैक्स के पैसों की खुली लूट है। 150 करोड़ रुपये का खर्च करने के बाद भी अगर 35 करोड़ का गेहूं नहीं बच पाया, तो यह सिस्टम की नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण है। अब हालत यह है कि अधिकारी जांच का झुनझुना थमा रहे हैं और सड़े हुए अनाज को नीलाम करने या नष्ट करने की तैयारी की जा रही है।


> बड़ा सवाल: इस करोड़ों के नुकसान की भरपाई क्या उन अधिकारियों की सैलरी से होगी जिनकी देखरेख में यह बर्बादी हुई? या फिर हर बार की तरह फाइलें धूल फांकती रहेंगी?

खास बातें: एक नजर में
| विवरण | आंकड़े/जानकारी |
|---|---|
| कुल अनाज की मात्रा | 22 हजार टन |
| अनाज की अनुमानित कीमत | ₹35 करोड़ |
| रखरखाव पर कुल खर्च | ₹150 करोड़ (लगभग) |
| छिड़काव की संख्या | 34 बार |
| मुख्य केंद्र | नूरगंज और दिवटिया वेयरहाउस, रायसेन |


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