
(आकाश गोहिल बेगमगंज) रायसेन जिले के बेगमगंज में हाल ही में आयोजित हुई लोक अदालत ने एक शानदार मिसाल पेश की है। आपसी सहमति और समझदारी से यहां कुल 703 मामलों का निपटारा किया गया। इस दौरान करोड़ों रुपए की वसूली भी हुई, जिससे न सिर्फ लोगों को न्याय मिला बल्कि कोर्ट का बोझ भी कम हुआ।
कैसे हुआ यह संभव?
न्यायालय परिसर में आयोजित इस नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रथम अपर सत्र एवं जिला न्यायाधीश श्रीमती सविता ओगले ने किया। उन्होंने सभी अधिवक्ताओं और पक्षकारों से अपील की कि वे आपसी राजीनामे के जरिए अपने मामलों को सुलझाएं। उनके इस आह्वान का असर भी दिखा और सभी न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं ने मिलकर लोगों को प्रेरित किया।
इस दौरान, विभिन्न न्यायाधीशों के न्यायालयों में अलग-अलग मामलों का निपटारा हुआ:
* प्रथम अपर सत्र जिला न्यायाधीश श्रीमती सविता ओगले के न्यायालय में 11 मामले सुलझे, जिसमें 5.41 लाख रुपये से अधिक की राशि का निपटारा हुआ।
* द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश सचिन द्विवेदी के न्यायालय में 10 मामलों में 10 लाख रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई।
* व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 1 अन्नाग्लोरी महेश्वरी के न्यायालय में 24 मामलों में 41 लाख रुपये से अधिक की वसूली हुई।
* व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 2 स्वेता चौहान के न्यायालय में 25 मामलों में 2.67 लाख रुपये से अधिक की राशि का निपटारा किया गया।
हर क्षेत्र में हुआ फायदा
लोक अदालत का लाभ सिर्फ सामान्य मुकदमों तक सीमित नहीं रहा। बिजली विभाग, नगर पालिका और बैंकों के मामलों में भी बड़ी सफलता मिली:
* बिजली विभाग के 296 मामलों से 29 लाख रुपये से अधिक की वसूली हुई।
* नगर पालिका के जलकर और संपत्ति कर के 101 मामलों से 2.75 लाख रुपये से अधिक की राशि वसूल की गई।
* बैंकों के 73 मामलों में 20 लाख रुपये से अधिक की वसूली कर उनका निपटारा किया गया।
इसके अलावा, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और तहसीलदार के न्यायालयों में भी 163 मामलों का निपटारा आपसी सहमति से किया गया। इस सफल आयोजन से यह साबित होता है कि कानूनी लड़ाई के बजाय आपसी सहमति से मामले सुलझाना कितना प्रभावी हो सकता है।