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रायसेन: 'जल गंगा अभियान' में भ्रष्टाचार पर बड़ी गाज, सचिव निलंबित; तत्कालीन CEO समेत कई अफसरों को नोटिस

2026-01-07  Raisen Waseem kureshi  303 views

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बेगमगंज (रायसेन): मध्यप्रदेश के रायसेन जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है। बेगमगंज जनपद की ग्राम पंचायत भूरेरू में 'जल गंगा अभियान' के तहत बनाए जा रहे खेत तालाबों के निर्माण में भारी वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं। इस मामले में जिला पंचायत प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) मनोज उपाध्याय ने सख्त रुख अपनाते हुए पंचायत सचिव कमलेश विश्वकर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

जांच में खुली पोल, बरती गई लापरवाही

सरकारी योजनाओं में बंदरबांट करने वालों के खिलाफ प्रशासन अब एक्शन मोड में है। मिली जानकारी के अनुसार, जल गंगा अभियान के तहत खेतों में तालाबों का निर्माण किया जाना था, ताकि जल संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। लेकिन भूरेरू पंचायत में इस महत्वपूर्ण कार्य में जमकर लापरवाही और वित्तीय गड़बड़ी की गई। शिकायत मिलने और शुरुआती जांच के बाद जब मामले की पुष्टि हुई, तो सचिव पर निलंबन की गाज गिरी।

इन अधिकारियों के गले में फंसी नोटिस की फांस

कार्रवाई केवल सचिव तक ही सीमित नहीं रही। जिला पंचायत सीईओ ने तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ सहित उन तमाम तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारियों को 'कारण बताओ' (SCN) नोटिस जारी किया है, जिनकी नाक के नीचे यह गड़बड़ी होती रही। नोटिस पाने वाले अधिकारियों में शामिल हैं:

 * लवकेश जसईवाल (सहायक परियोजना अधिकारी, मनरेगा)

 * जागृति उइके (तत्कालीन उपयंत्री/प्रभारी सहायक यंत्री)

 * रामलाल मंडरई (उपयंत्री, मनरेगा)

 * सावन श्रीवास (सहायक लेखा अधिकारी, मनरेगा)

 * दीपक अवस्थी (ग्राम रोजगार सहायक)

19 जनवरी तक का अल्टीमेटम

प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को जवाब दाखिल करने के लिए 19 जनवरी 2026 तक का समय दिया है। यदि निर्धारित समय तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो इन अधिकारियों पर विभागीय जांच के साथ-साथ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

इस कार्रवाई से जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'जल गंगा अभियान' में इस तरह की धांधली सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जनता के पैसे और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी योजनाओं में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सचिव का निलंबन और आला अधिकारियों को नोटिस मिलना इस बात का संकेत है कि अब जनपद स्तर पर चल रहे विकास कार्यों की मॉनिटरिंग और भी सख्त होगी।


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