
रिपोर्ट: राकेश जैन,रायसेन,मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के रायसेन जिला अस्पताल की हालत बद से बदतर होती जा रही है। यहां व्यवस्थाओं में इतनी खामियां हैं कि मरीजों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। हमारी टीम ने मरीज बनकर अस्पताल का निरीक्षण किया और जो स्थिति सामने आई,वह किसी को भी चिंतित कर सकती है।
पैथोलॉजी लेब: इंतजार में बीतते घंटे
इसके बाद हम अस्पताल की पैथोलॉजी लैब पहुंचे। यहां केवल आउटसोर्स कर्मचारी मौजूद थे। जब उनसे पूछा गया कि टेक्नीशियन कब आते हैं, तो उन्होंने बताया कि ड्यूटी सुबह 9 बजे से होती है। लेकिन 9:45 तक कोई टेक्नीशियन वहां मौजूद नहीं था।
जब हमने इस देरी के बारे में अन्य कर्मचारियों से सवाल किया, तो जवाब मिला, "शायद ड्यूटी तय हो रही हो।" यह जवाब अस्पताल की लापरवाही को स्पष्ट करता है।
प्रशासन की खामोशी
सिविल सर्जन अनिल ओड छुट्टी पर थे, और उनकी अनुपस्थिति में व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। जब हमने सीएमएचओ डॉक्टर दिनेश खत्री से फोन पर संपर्क किया, तो उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि जो प्रभार में हो, उनसे बात करें।
इसके बाद प्रभारी डॉक्टर आरएमओ डॉ. गुप्ता से बात की गई। उन्होंने व्यवस्था करने का आश्वासन दिया, लेकिन तब तक घड़ी में सुबह 10 बज चुके थे। जबकि पैथोलॉजी सेवाएं 9 बजे शुरू होनी चाहिए थीं।
मरीजों की परेशानी
इस पूरी प्रक्रिया में एक घंटा बीत चुका था और जांच कराने आए मरीज लाइन में खड़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। कुछ मरीज ऐसे भी थे जिन्हें जांच रिपोर्ट में देरी होने के कारण इलाज में परेशानी हो रही थी।
अस्पताल की दुर्दशा: जिम्मेदार कौन?
रायसेन जिला अस्पताल की यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करती है। अस्पताल में न तो डॉक्टर समय पर ड्यूटी पर पहुंचते हैं और न ही मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं।
क्या प्रशासन जागेगा?
प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इन समस्याओं को गंभीरता से लेगा और अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के लिए कदम उठाएगा? या फिर यह बदहाली मरीजों की तकलीफें बढ़ाती रहेगी?
रायसेन जिला अस्पताल की यह स्थिति सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती है। मरीजों को राहत कब मिलेगी, यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है।