
वसीम कुरेशी सांची, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के विश्व धरोहर स्थल सांची में रिस्पांसिबल टूरिज्म मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए पर्यटन स्थलों को सुरक्षित बनाना और उन्हें पर्यटन उद्योग में आर्थिक रूप से सशक्त करना था। "महिलाओं हेतु सुरक्षित पर्यटन स्थल परियोजना" के अंतर्गत, मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड और समर्थ संस्था ने मिलकर इस एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यक्रम को साकार किया, जिसमें कई विभागों के अधिकारी, पुलिस प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधि शामिल हुए।
सांची बनेगा महिला-संचालित पर्यटन केंद्र
इस कार्यशाला में एक बड़ा खुलासा हुआ। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के कौशल संचालक डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह ने घोषणा की कि जल्द ही सांची का पर्यटक सुविधा केंद्र (TFC) प्रशिक्षित महिलाओं और युवतियों द्वारा संचालित किया जाएगा। यह कदम न केवल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि पर्यटकों के अनुभव को भी बेहतर बनाएगा। इन महिला गाइड्स के माध्यम से पर्यटक सांची के अलावा आस-पास के ऐतिहासिक स्थलों जैसे उदयगिरि, विदिशा, ग्यारसपुर, सतधारा और सोनारी के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे सांची एक केंद्र के रूप में विकसित होगा, जहां से अन्य छोटे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी।
ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
कार्यशाला में ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे के विकास पर भी जोर दिया गया। डॉ. सिंह ने बताया कि ये होमस्टे पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति, जीवनशैली और स्थानीय व्यंजनों का अनुभव देंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए आय के नए साधन पैदा होंगे। यह परियोजना पर्यटन को केवल बड़े शहरों तक सीमित न रखकर उसे ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने का एक अभिनव प्रयास है।
सुरक्षा पर विशेष ध्यान
महिलाओं की सुरक्षा इस पूरी परियोजना का सबसे अहम पहलू है। पुलिस इंस्पेक्टर अपाला सिंह ने महिला गाइड्स को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि महिला गाइड्स को हमेशा अपने स्थानीय थाने से संपर्क में रहना चाहिए और बीट प्रभारी का नंबर रखना चाहिए। इसके साथ ही, पर्यटकों को लाने-ले जाने वाले ऑटो चालकों का वेरिफिकेशन भी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया। डॉ. आलोक चौबे ने इस बात पर भी जोर दिया कि होटलों में काम करने वाले सभी कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होना चाहिए, ताकि सभी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
आत्मनिर्भरता की झलक
कार्यशाला के दौरान एक बेहद प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। परियोजना के तहत प्रशिक्षित महिलाओं और युवतियों ने अपने हाथ से बनाए गए सॉवेनियर (स्मारिका) के स्टॉल लगाए। इन स्टॉलों पर हस्तनिर्मित कलाकृतियाँ और स्थानीय उत्पाद बेचे गए, जिनकी बिक्री ने उनकी आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास को दर्शाया। यह साबित करता है कि प्रशिक्षण और सही अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं।
सांची में आयोजित यह कार्यशाला महिला सुरक्षा और पर्यटन विकास का एक बेहतरीन संगम थी। यह परियोजना न केवल पर्यटन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र भी बनाएगी। यह पहल मध्य प्रदेश को एक सुरक्षित और समावेशी पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी।