
| Exclusive रिपोर्ट
बुरहानपुर/देवास। मध्य प्रदेश में नकली नोटों का कारोबार एक बार फिर सुर्खियों में है। देवास जिले में उजागर हुए जाली नोट कांड की जांच ने अब बुरहानपुर जिले का रुख कर लिया है। बुधवार को देवास पुलिस ने खकनार थाना क्षेत्र में बड़ी कार्यवाही करते हुए दो आरोपियों को हिरासत में लिया है। इन दोनों की गिरफ्तारी देवास में पहले पकड़े गए मुख्य आरोपी की निशानदेही पर की गई है। पुलिस अब इस गिरोह की जड़ों को खंगालने में जुट गई है, जो प्रदेश के कई जिलों में फैला हो सकता है।
🔍 जांच का विस्तार: देवास से बुरहानपुर तक पहुंची कार्रवाई
देवास पुलिस की यह कार्रवाई उस वक्त हुई, जब सोमवार को जिले में चल रहे फर्जी नोट छापने के एक बड़े कारखाने का पर्दाफाश किया गया था। पांच लोगों को मौके से गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से तकरीबन 15 लाख 21 हजार रुपये मूल्य के जाली नोट बरामद किए गए। साथ ही, अर्द्ध छपे नोट, प्रिंटर, स्कैनिंग पेटी, थ्रेड, कच्चा माल, लैपटॉप आदि उपकरण भी जब्त किए गए।
पकड़े गए आरोपियों ने खुलासा किया कि वे ₹100, ₹200 और ₹500 के नोटों की छपाई कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में ये बात सामने आई है कि इन नकली नोटों को प्रदेशभर में अलग-अलग जिलों में खपाने की तैयारी थी।
🧠 मुख्य आरोपी सुनील पाटिल: नकली नोट नेटवर्क का मास्टरमाइंड
देवास पुलिस की पड़ताल में यह सामने आया है कि पूरे नेटवर्क का सरगना बुरहानपुर जिले के खकनार का रहने वाला सुनील पाटिल है। पुलिस ने उसे उसके चार साथियों के साथ पकड़ा है:
सुनील पाटिल, निवासी खकनार, जिला बुरहानपुर
राजकुमार मालवीय, ग्राम खेड़ाखजूरिया, सोनकच्छ
सचिन नागर, ग्राम दुधलाई, सोनकच्छ
शुभम वर्मा और शक्तिसिंह चावड़ा, ग्राम आगरोद निवासी
सुनील के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए पुलिस ने उसे गिरोह का मास्टरमाइंड करार दिया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोटों की यह खेप किन-किन जिलों में भेजी जानी थी और इसमें और कौन-कौन शामिल है।
🔐 पहले भी जेल की हवा खा चुका है सुनील पाटिल
यह पहली बार नहीं है जब सुनील पाटिल इस तरह के गंभीर अपराध में पकड़ा गया है। पुलिस के अनुसार, वह पहले भी नकली नोट के मामले में जेल जा चुका है और इसी दौरान उसने एक नए नेटवर्क की साजिश रची थी।
सुनील के खिलाफ कई जिलों में अपराध दर्ज हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
पुनासा, जिला खंडवा
हीरानगर, इंदौर
पानीगेट और रावपुरा, जिला वडोदरा, गुजरात
किशनगंज, जिला इंदौर
एसटीएफ, भोपाल और उज्जैन
इन सभी जगहों पर नकली नोटों से जुड़े मामलों में सुनील की भूमिका पाई गई है। सूत्रों के मुताबिक, सुनील के गिरोह के सदस्य बैंक, बाजार, पेट्रोल पंप और स्थानीय दुकानों में इन नकली नोटों को असली करंसी में बदलने की कोशिश करते थे।
- 🚨 प्रदेशभर में छापेमारी की तैयारी, कई जिलों में सक्रिय टीमें
देवास पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है। पुलिस की टीमें उज्जैन, इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में सक्रिय हैं, जहां सुनील और उसके साथियों की गतिविधियों के संकेत मिले हैं।
सूत्रों का दावा है कि इस गिरोह के तार महाराष्ट्र और गुजरात तक भी जुड़े हो सकते हैं। देवास पुलिस ने अलग-अलग जिलों की पुलिस से समन्वय बनाकर संयुक्त कार्यवाही की योजना बनाई है।
📢 प्रशासन की चेतावनी: नकली नोट से सावधान रहें नागरिक
पुलिस व प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे लेन-देन करते समय सतर्क रहें, विशेषकर ₹100, ₹200 और ₹500 के नोटों की जांच करें। किसी भी संदिग्ध नोट की जानकारी तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में दें। साथ ही, दुकानदारों और व्यापारियों को नोट की जांच के लिए नकली नोट पहचानने वाली मशीन का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
📈 बढ़ता खतरा और कमजोर निगरानी तंत्र
यह मामला न केवल प्रदेश में फर्जी नोटों की बढ़ती समस्या को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह संगठित अपराधी जेल में रहते हुए भी अपने नेटवर्क को सक्रिय बनाए रखते हैं।
पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए यह चुनौती है कि वे तकनीक, संसाधन और सूचना तंत्र के सहयोग से ऐसे गिरोहों पर समय रहते लगाम कसें।
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बुरहानपुर में हुई ताजा गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नकली नोटों का यह खेल किसी एक जिले तक सीमित नहीं है। देवास पुलिस की त्वरित और सटीक कार्यवाही ने इस गिरोह के कई सदस्यों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, लेकिन जांच अभी अधूरी है। आने वाले दिनों में और खुलासे व गिरफ्तारियों की पूरी संभावना है।