
भोपाल।
नगर परिषद बड़ी के अंतर्गत भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार को बड़ी कार्यवाही करते हुए नगर परिषद के कंप्यूटर ऑपरेटर शुभम जैन और समयपाल जय कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्यवाही भोपाल के एमपी नगर, जोन-1 स्थित बापू की कुटिया के सामने की गई।
क्या है मामला?
भोपाल के ठेकेदार राजेश मिश्रा ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी कि नगर परिषद की ओर से उनके द्वारा जमा की गई 3 लाख 40 हजार रुपये की अमानत राशि को लौटाने के लिए संबंधित कर्मचारी और अधिकारी उनसे रिश्वत की मांग कर रहे हैं। आरोप है कि कंप्यूटर ऑपरेटर शुभम जैन, समयपाल जय कुमार और नगर परिषद बड़ी के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) ने ठेकेदार से राशि निकालने के बदले में 1 लाख रुपये रिश्वत मांगी।
रंगे हाथों पकड़ा गया
लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। योजनाबद्ध तरीके से ठेकेदार राजेश मिश्रा को एक लाख रुपये देने के लिए कहा गया। जैसे ही आरोपी कर्मचारियों ने यह रकम ली, पुलिस ने उन्हें मौके पर गिरफ्तार कर लिया।
सीएमओ पर भी शिकंजा
लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में नगर परिषद बड़ी के सीएमओ को भी आरोपी बनाया है। ठेकेदार का आरोप है कि इस पूरे भ्रष्टाचार में सीएमओ की सहमति और मिलीभगत थी।
लोकायुक्त की सख्त कार्रवाई
लोकायुक्त पुलिस का कहना है कि सरकारी कार्यों में रिश्वत लेना गंभीर अपराध है, और इसके लिए किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। गिरफ्तार कर्मचारियों और अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
ठेकेदार की शिकायत से हुआ खुलासा
शिकायतकर्ता राजेश मिश्रा ने बताया कि वह लंबे समय से अमानत राशि वापस पाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बिना रिश्वत के उनका काम आगे नहीं बढ़ रहा था। अंततः उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया और लोकायुक्त पुलिस से संपर्क किया।
आरोपियों पर क्या होगा अगला कदम?
लोकायुक्त पुलिस द्वारा मामले की जांच जारी है। गिरफ्तार कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है ताकि अन्य संभावित दोषियों का भी खुलासा हो सके। इस घटना ने नगर परिषद में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है, जिससे नगर परिषद की छवि पर सवाल उठ रहे हैं।