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MP Electricity Price Hike: मध्य प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका! 1 अप्रैल से महंगी होगी बिजली? ऊर्जा मंत्री ने दिए संकेत

2026-02-25  Amit raikwar  169 views

ImgResizer_image (2)भोपाल। मध्य प्रदेश की जनता पर महंगाई की एक और मार पड़ने वाली है। यदि आप भी हर महीने बिजली के बिल से परेशान रहते हैं, तो अपनी जेब और ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। प्रदेश में 1 अप्रैल से बिजली की दरों में बड़ा इजाफा हो सकता है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के हालिया बयान ने प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

बिजली कंपनियों ने बढ़ाया हाथ, जनता के बजट पर आफत

मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों ने अपने बढ़ते खर्चों और घाटे की भरपाई के लिए विद्युत विनियामक आयोग (Electricity Regulatory Commission) को टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने स्पष्ट किया है कि कंपनियों के खर्चों के आधार पर बिजली की दरें तय की जाती हैं।

> ऊर्जा मंत्री का बयान: “विद्युत विनियामक आयोग को प्रस्ताव भेज दिया गया है। अंतिम निर्णय आयोग को ही लेना है। बिजली कंपनियों के खर्चों का आकलन करने के बाद ही नई दरें तय की जाएंगी।”

क्या कहता है नया प्रस्ताव?

हालांकि अभी इस पर विस्तृत चर्चा होना बाकी है, लेकिन सूत्रों की मानें तो बिजली बिल में अतिरिक्त सरचार्ज या यूनिट की दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष के साथ लागू होने की आशंका है। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग, उद्योगों और उन घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो पहले से ही बढ़ते बिलों से त्रस्त हैं।

किसान और उद्योग: क्या मिलेगी राहत?

टैरिफ बढ़ने की खबरों के बीच ऊर्जा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि किसानों और उद्योगों को लेकर प्रक्रिया जारी है। सरकार का प्रयास है कि उत्पादन क्षेत्र पर इसका न्यूनतम असर पड़े। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सरकार सब्सिडी के जरिए आम जनता को राहत देगी या फिर सारा बोझ जनता के सिर मढ़ा जाएगा?

सियासत तेज: कांग्रेस पर साधा निशाना

बिजली की कीमतों पर मचे घमासान के बीच ऊर्जा मंत्री ने विपक्षी दल कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि:

 कांग्रेस का एजेंडा: कांग्रेस का एकमात्र लक्ष्य किसी भी तरह सत्ता में आना है।

 भ्रम का माहौल: देश और प्रदेश में कांग्रेस द्वारा भ्रम का वातावरण तैयार किया जा रहा है।

  कथनी और करनी: ऊर्जा मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है।

कब होगा अंतिम फैसला?

बिजली की नई दरों पर अंतिम मुहर विद्युत विनियामक आयोग की जनसुनवाई के बाद लगेगी। आयोग बिजली कंपनियों के दावों की पड़ताल करेगा और फिर तय करेगा कि जनता की जेब से कितने पैसे और निकालने हैं। 1 अप्रैल की डेडलाइन नजदीक है, ऐसे में अब सबकी नजरें आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।


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