
विदिशा, मध्य प्रदेश। विदिशा जिले को अब एक नई सामाजिक क्रांति का केंद्र बनने की तैयारी है। एक साहसिक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए स्थानीय गैर-सरकारी संगठन विदिशा सोशल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन ने संकल्प लिया है कि वह अगले एक वर्ष के भीतर पूरे जिले को बाल विवाह की कुप्रथा से पूरी तरह मुक्त कराएगा। इस बड़े अभियान के लिए संगठन ने भारत सरकार की 100 दिवसीय विशेष कार्ययोजना से प्रेरणा ली है और अब वह सरकारी तंत्र के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर व्यापक जागरूकता फैलाने का बीड़ा उठा चुका है।
संगठन का यह 'मिशन 365' भारत सरकार के महत्वाकांक्षी 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान के एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा होने के अवसर पर शुरू किया गया है, जिसने जिले में बाल विवाह के खिलाफ एक नई ऊर्जा भर दी है।
स्कूल से उठी जागरूकता की पहली लहर
अभियान की शुरुआत ग्यारसपुर विकासखंड के त्यौदा गाँव स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल से हुई, जहाँ जागरूकता की पहली लहर उठी। इस कार्यक्रम का नेतृत्व अभियान की जिला समन्वयक दीपा शर्मा और कम्युनिटी सोशल वर्करों ने किया।
छात्राओं और शिक्षकों के बीच बाल विवाह के सामाजिक, स्वास्थ्य और कानूनी दुष्प्रभावों पर गहन चर्चा हुई। सबसे खास बात यह रही कि स्कूल की छात्राओं ने स्वयं पहल करते हुए अपने हाथों पर मेहंदी से आकर्षक डिज़ाइन के साथ 'बाल विवाह नहीं' के संदेश लिखवाए और सामूहिक रूप से यह शपथ ली कि वे अपने समाज में या आस-पास कहीं भी बाल विवाह नहीं होने देंगी। यह दृश्य न केवल प्रेरणादायक था, बल्कि यह बताता है कि समाज के सबसे युवा वर्ग में अब इस कुप्रथा को समाप्त करने की कितनी प्रबल इच्छाशक्ति है।
सिर्फ दुल्हन-दूल्हे पर नहीं, अब बारातियों पर भी खतरा!
दीपा शर्मा ने इस अभियान के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि उनका संगठन पूरे देश को बाल विवाह से मुक्त करने के राष्ट्रीय संकल्प में एक मजबूत भागीदार बनना चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जागरूकता रैलियों, शपथ ग्रहण कार्यक्रमों और स्कूल-कॉलेजों में संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (Prohibition of Child Marriage Act) के कड़े प्रावधानों से अवगत कराया जा रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण जानकारी जो आम जनता तक पहुंचाई जा रही है, वह यह है कि अब बाल विवाह में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोग कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएंगे। इसका मतलब है कि सिर्फ माता-पिता ही नहीं, बल्कि शादी के लिए बुकिंग करने वाले कैटरर्स, टेंट हाउस मालिक, बैंड वाले, पुरोहित (पंडित/काज़ी) और यहाँ तक कि शादी में शामिल होने वाले मेहमान भी इस अपराध के लिए जिम्मेदार माने जाएंगे। यह नया प्रावधान बाल विवाह रोकने के लिए एक बड़ा डिटरेंट (बाधा) साबित होगा।
बड़े नेटवर्क का हिस्सा: 1 लाख बाल विवाह रोकने की सफलता
विदिशा सोशल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन कोई अकेला काम करने वाला संगठन नहीं है। यह देशभर के जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नेटवर्क देश के 451 जिलों में 250 से अधिक साथी संगठनों के साथ मिलकर काम करता है।
दीपा शर्मा ने गर्व के साथ बताया कि पिछले एक वर्ष में, इस विशाल नेटवर्क ने देशभर में एक लाख से अधिक बाल विवाह को सफलतापूर्वक रोकने में सफलता हासिल की है। विदिशा जिले में भी इस संगठन ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ बेहतरीन तालमेल बिठाकर कई संवेदनशील मामलों में प्रभावी हस्तक्षेप किया है और बच्चियों को इस कुप्रथा का शिकार होने से बचाया है।
एक वर्ष में विदिशा को बाल विवाह मुक्त बनाना एक कठिन चुनौती हो सकती है, लेकिन संगठन की दृढ़ता और सरकारी तंत्र का सहयोग यह स्पष्ट करता है कि यह संकल्प जल्द ही हकीकत में बदल सकता है।