
सांची (रायसेन)। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में मनरेगा (MGNREGA) योजना का नाम बदलने के केंद्र सरकार के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में उबाल ला दिया है। रविवार को सांची के सागर–भोपाल तिराहे स्थित कामधेनु शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विशाल धरना प्रदर्शन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार मिलकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की विरासत को मिटाने की साजिश रच रही है।
“बापू का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान”
सिलवानी विधायक और जिला कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र पटेल के नेतृत्व में आयोजित इस धरने में कांग्रेसियों ने 'वीबी जी राम जी' नामकरण को गांधी जी का सीधा अपमान करार दिया। विधायक पटेल ने संबोधित करते हुए कहा, “मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों का सहारा और महात्मा गांधी के सपनों का प्रतिबिंब है। भाजपा के पास खुद की कोई नई विजनरी योजना नहीं है, इसलिए वे पुरानी और सफल योजनाओं के नाम बदलकर राजनीति कर रहे हैं।”
60:40 का गणित: गरीबों पर पड़ेगा भारी बोझ
धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने तकनीकी आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा। नेताओं ने बताया कि पहले मनरेगा में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 90:10 के अनुपात में होती थी, जिसे अब बदलकर 60:40 कर दिया गया है।
कांग्रेस का तर्क है कि:
* मध्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति पहले से ही जर्जर है।
* हिस्सेदारी बदलने से राज्य सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
* इसका सीधा नुकसान ग्रामीण मजदूरों को होगा और रोजगार के अवसर कम होंगे।
किसानों और तानाशाही पर बरसे नेता
संगठन प्रभारी शैलेंद्र पटेल ने भाजपा की नीतियों को 'दमनकारी' बताते हुए कहा कि भाजपा महात्मा गांधी की विचारधारा से डरती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास में विफल रही है; न तो किसानों को प्याज का सही दाम मिल रहा है और न ही स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जा रही है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी दी कि यदि गांधी जी के नाम के साथ छेड़छाड़ बंद नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र बनाया जाएगा।
एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
धरने के समापन पर कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने रायसेन एसडीएम मनीष शर्मा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि योजना का मूल स्वरूप और नाम यथावत रखा जाए।
धरने में ये दिग्गज रहे मौजूद:
इस प्रदर्शन में पूर्व विधायक देवेंद्र पटेल (गड़रवास), मुमताज खान, डॉ. जी.सी. गौतम, सांची ब्लॉक अध्यक्ष अंकित मेहतो, पवित्रा कौर और चंदा चौहान सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन एडवोकेट मनोज अग्रवाल ने किया।
सांची में हुआ यह विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में 'नाम बदलने की राजनीति' मध्य प्रदेश में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ग्रामीण विकास और गांधीवादी प्रतीकों के मुद्दे पर पीछे नहीं हटने वाली है।